महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर निकली पद यात्रा।
ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर एक पद यात्रा संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से प्रसाद के आवास तक निकाली गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर पदयात्रा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पदयात्रा के माध्यम से प्रसाद जी की कृतियों, उनके साहित्य, उनकी धरोहर को सँजोकर आने वाली पीढी को अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम साबित होगा। काशी की हिन्दी साहित्य ने पूरे देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में अपना परचम लहराया है, दुनियाँ में हिन्दी साहित्य को प्रसाद जी के साहित्य ने एक ऐसा तोहफा दिया है जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। पदयात्रा के जरिये प्रसाद का साहित्य आम पाठकों से जुड़ने का भी बहुत ही प्रभावकारी माध्यम बनेगा।
पदयात्रा की संयोजक और प्रसाद जी प्रपौत्री डॉ कविता प्रसाद ने बताया कि यह पहली बार यात्रा निकाली जा रही है लेकिन इसे प्रसाद की जयंती पर हर वर्ष निकाला जाएगा। इस पदयात्रा के माध्यम से हिन्दी के छात्रों के साथ साथ आम पाठकों को भी जोड़ा जाएगा। विधान परिषद सदस्य श्री धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि पद यात्रा का आयोजन हिन्दी साहित्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह एक ऐतिहासिक क्षण है जिसके इस नगर के पत्रकार, साहित्यकार, प्रबुद्ध जन साक्षी है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ इंदीवर ने कहा कि आम जन को यह हिन्दी साहित्य से जोड़ने का नायाब तरीका है। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो राम सुधार सिंह ने कहा कि इस तरह की पदयात्रा से हिन्दी मातृ भाषा को लेकर आज की पीढ़ी में जागरुकता बढ़ेगी। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ दयानिधि मिश्र जी ने कहा कि प्रसाद जी की कृतियाँ एक अमूल्य धरोहर हैं और हमें इस तरह के आयोजन से उनकी धरोहर को सहेजने का कार्य करने की आवश्यकता है। पदयात्रा में प्रमुख रूप से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कवीन्द्र नारायण, प्रो श्रद्धानंद, डॉ अत्रि भारद्वाज, कवि गणेश गंभीर सहित भारी संख्या मे लोग शामिल रहे थे।


