बाबू जगजीवन राम की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। पूर्व उपप्रधान मंत्री स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू बाबू जगजीवन राम की 119 वीं जयंती पर संत रविदास मंदिर, राजघाट के सभागार मे वाबू जगजीवन राम "कल और आज" विषयक संगोष्ठी का आयोजन दी रविदास स्मारक सोसायटी के तत्वाधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विकास उपाध्याय ने कहा कि बाबू जगजीवन राम का जीवन सहयोग, त्याग और श्रद्धा भाव से परिपूर्ण रहा। वह ताउम्र गरीबों, मजदूरों व निर्मलो की लड़ाई लड़ते रहे, कौमी एकता, समतामूलक समाज की संरचना में उनकी महती भूमिका थी। गोष्ठी मे बिहार, दिल्ली एवं यूपी से आये अनुयायियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुजारी रामविलास दास ने की। मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ जमशंकर जय ने कहा कि बाबू जगजीवन राम जनतांत्रिक मूल्यों के सम्पोषक थे।
सामाजिक संरचना में व्याप्त पाखंड के वह प्रवल विरोधी रहे। 50 वर्षों का उनका संसदीय कार्यकाल उनके विराट कृतित्व एवं व्यक्तित्व का उद्घोष है। जगजीवन राम राष्ट्रीय एकता अखण्डता, समरसता के सच्चे उन्नायक थे। आयोजन में लोगों ने भारत सरकार से उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न देने की माँग रखी। मुख्य रूप से डॉ ईश्वर चन्द्र पटेल, डॉ राजीव सिंह, अनुराग त्रिवेदी, धर्मराज ने संगोष्टी को सम्बोधित किया, संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन वीरेन्द्र बबलू ने किया। कार्यक्रम मुख्य रूप से बृजेश कुमार, रमेश गुप्ता, रामचन्द्र शर्मा, हारूमोहन चक्रवती, संतोष शाह, अंगद शाहनी, दुर्गा मांझी, मदन, अर्पित पाण्डेय, लालाराम किशुन, पार्षद बबलू शाह, धीरज राजभर, दीपक यादव आदिलोग उपस्थित थे।


