काशी विद्यापीठ में मानसिक समस्याओं के विषय पर सेमिनार का आयोजन।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं इस आयोजन की संयोजिका प्रो. रश्मि सिंह ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत के लिए जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 7.5 फीसदी आबादी किसी-न-किसी मानसिक समस्या से जूझ रही है। विश्व में मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की समस्या से जूझ रहे लोगों में भारत का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा शामिल है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य से महत्वपूर्ण विषय पर जितनी बात की जाए उतना कम है।
Right To Mental Health विषय पर अपने वक्तव्य में मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. सीमी आज़म, सहायक आचार्य, मनोविज्ञान विभाग, काशी नरेश पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, भदोही जो पूर्व में शोध अधिकारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली के तौर पर नियुक्त थीं, अपने शोध अनुभवों को साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व तथा उससे संबंधित प्रदत्त अधिकारों के प्रति विद्यार्थियों को जागृत किया। उन्होंने अपने विस्तृत चर्चा में मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 के अंतर्गत मानसिक रोगियों के लिए इस अधिनियम में दी गई सुविधाओं और लाभों की जानकारी प्रदान की। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य योजना (1982, 2003), जिला मानसिक स्वास्थ्य योजना (1996) के उद्देश्यों, कोविड-19 के बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं एवं बीमारियों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका, एवं कोविड-19 के आलोक में मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों हेतु केंद्र सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में शामिल बिंदुओं आदि पर अपने विचार साझा किया।
डॉ. आजम ने इसी के साथ विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को भी सहजता से शांत किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुकेश कुमार पंथ ने किया। इस दौरान प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव एवं बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर, पी.जी. डिप्लोमा तथा यूजी के छात्र उपस्थित रहे।
