Kashi ka News महाश्मशान में धधकती चिताओं के बीच अलौकिक है चिता भस्म की होली

महाश्मशान में धधकती चिताओं के बीच अलौकिक है चिता भस्म की होली।

ब्यूरो आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी, 4 मार्च, शनिवार को काशी में करीब तीन सौ वर्षो से चली आ रही परम्परा, औघड़ शिव  शंकर के संग शिवभक्तों द्वारा मणिकर्णिका घाट के महाश्मशान में धधकती चिताओं के बीच खेली जाने वाली चिता भस्म की होली खेलने के लिए श्रद्धालुओं का जनसमूह उमड़ पड़ा।

सुबह 11 बजे महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु गुप्ता, व्यवस्थापक गुलशन कपूर एवं सतुवा बाबा आश्रम के महंत संतोष दास द्वारा बाबा महाश्मशान नाथ का भव्य श्रृंगार कर विधिवत पूजन किया गया। तत्पश्चात डमरू दल के भक्तों द्वारा डमरूओं के ध्वनियों से आकाश गुंजायमान हो उठा।

उसके बाद चिता भस्म की होली आरम्भ हुआ, धधकती चिताओं के बीच हजारों शिवगणों का समूह चिता भस्म से महाऔघड़ शिव के संग होली खेलते हुए नगाडों के थाप पर मदमस्त होकर महादेव का उदघोष करते रहे। इस विश्व विख्यात चिता भस्म की होली में किन्नर, औघड़, साधू -संत के अलावा विदेशी पर्यटक, बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रही। वहीं दूर दराज से शवदाह के लिए आए शवयात्री इस अदभुत होली को देख आश्चर्य चकित हो रहे थे।

महाश्मशाननाथ सेवा समिति के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि काशी में यह मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर अपने धाम काशी लाते हैं, जिसे काशीवासी उत्सव के रूप में मनाते हैं और रंग का त्यौहार होली का प्रारंभ माना जाता है। उस उत्सव में देवी-देवताओं के अलावा यक्ष, गंधर्व मनुष्य शामिल होते हैं, किंतु भूत, प्रेत, पिचास, डाकिनी, शाकिनी, औघड़, कापालिक, किन्नर, एवं नकारात्मक शक्तियों को बाबा ने इन सबके बीच आने से मना किया था। अपने इन सब प्रिय गणों के साथ स्वयं महादेव महाऔघड़ रूप मे एकादशी के अगले दिन महाश्मशान में चिता भस्म से होली खेलते हैं।

अबकी बार भारी भीड़ उमड़ने से पुलिस बल भी मुस्तैद रहे, नशे में धूत कुछ युवकों द्वारा महिलाओं के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार की शिकायत से पुलिस को हल्की लाठीचार्ज कर भीड़ को नियंत्रित करनी पड़ी।