Kashi ka News क्या है काशी के अष्टभैरव में भीषण भैरव "भूत भैरव" जी का महात्म्य

क्या है काशी के अष्टभैरव में भीषण भैरव "भूत भैरव" जी का महात्म्य। 

ब्यूरो आनंद सिंह अन्ना

वाराणसी। समस्त धार्मिक पुस्तकों में काशी की महिमा वर्णित है। देवो के देव महादेव की इस प्रिय नगरी में समस्त देवी-देवताओ का वास है, उन्हीं में भगवान शिव के अंशावतार भैरव भी अष्ट भैरव के स्वरूप मे विद्यमान होकर जगत का कल्याण करते हैं। अष्ट भैरव में ही एक भीषण भैरव है जिन्हें  भूत भैरव के नाम से जाना जाता है।

काशी के मध्य मैदागिन चौराहें के चंद दूरी पर लोहटिया क्षेत्र के नकास मुहल्ले में बाबा भीषण भैरव का प्राचीन मंदिर है। बाबा भूत भैरव जी के समीप ही स्वयंभू लिंग जठेशेवर महादेव के अलावा दर्जनों अन्य प्रसिद्ध देवी देवताओं के प्राचीन मंदिर है। भीषण भैरव का भूत भैरव नाम कैसे पड़ा इस पर एक बुजुर्ग ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व में मंदिर का एरिया जंगलमय होने के कारण काफी सुनसान रहता था, लोग दिन में आने से भयभीत होते थे। बच्चे उधर खेलने ना जा पाए इसलिए भूत के नाम से डरातें, धीरे-धीरे इस क्षेत्र को एव बाबा भीषण भैरव को भी भूत भैरव के नाम से जाना जाने लगा।  

बाबा भूत भैरव मंदिर के पुजारी अर्जून पांडे ने बताया कि बाबा भूत भैरव जी का स्वरूप भीषण, लाल वर्ण एव चार भुजाधारी है, जिनके एक हाथ में कमल दल दुसरे, हाथ में तलवार, तीसरे हाथ में त्रिशूल तथा चौथे हाथ में पात्र हैं। बाबा की पत्नी चामुंडा है, सवारी सिंह है, नक्षत्र स्वाति तथा उत्तर दिशा के संरक्षक है। बाबा के दर्शन, पूजा-पाठ से भक्तों को नजर, जादू-टोना और भूत-प्रेत बाधा, नाना प्रकार के उपद्रवों से मुक्ति मिलती है। पुजारी जी ने बताया की बाबा की सुबह 9 बजे एव रात 9 बजे भव्य आरती होता है। प्रसाद में फल-फूल मिष्ठान के अलावा भक्तों के मन्नत पूर्ण में गांजा भरा चिलम, मदिरा आदि का भी भोग रोजाना लगता है। हर रविवार एव मंगलवार को बाबा भूत भैरव जी का विशेष दिन है, दूर-दूर से लोग बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।