Kashi ka News प्रजापति कुंभकार हितकारिणी सभा का दबंगों के कारण नहीं हुआ चुनाव

प्रजापति कुंभकार हितकारिणी सभा का दबंगों के कारण नहीं हुआ चुनाव।

ब्यूरो आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। दिनांक 8 मई दिन सोमवार को सिगरा थाना अंतर्गत लल्लापुरा सिथत प्रजापति समाज की बहुमूल्य संपत्ति पर स्थानीय कुछ दबंगों के द्वारा कब्जा कर स्कूल प्रांगण को मैरिज लॉन बना कर उपयोग किया जा रहा था। संस्था प्रजापति कुंभकार हितकारिणी सभा का माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश अनुसार चुनाव कराने हेतु दिनांक 21 मई 2023 निर्धारित हो चुका था। जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा नामित जिला समाज कल्याण अधिकारी को संस्था का चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय द्वारा चुनाव प्रक्रिया में अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी, जिसके अनुसार चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए प्रजापति कुंभकार हितकारिणी सभा के संरक्षक मंडल तदर्थ प्रबंध समिति व सदस्यों में से 16 सदस्यीय कमेटी नामित की गई थी। कमेटी अनुसार दिनांक 6 मई 2023 से 8 मई 2023 तक नामांकन प्रपत्र की बिक्री व जमा की कार्यवाही हो रही थी परंतु अवैध कब्जे धारियों द्वारा लगातार दो दिन से सभा प्रांगण के मुख्य गेट पर ताला लगा कर फरार चल रहे थे। 

चुनाव समिति जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के सहयोग से गेट के बाहर ही चुनाव प्रक्रिया संपन्न करा रहे थे इसी बीच याचिकाकर्ता दिनेश प्रजापति समाजसेवी सोमनाथ प्रजापति एव लक्ष्मी नारायण प्रजापति ने जब यह देखा की सारे परमिशन सारे अधिकार होते हुए भी सभा भवन में चुनाव समिति को चुनाव कराने हेतु जगह नहीं दिया जा रहा है और क्षेत्रीय पुलिस वहां मूकबधिर बनकर खड़ी रही। इस पर सभी लोगों ने मिलकर एक राय होकर चार चौधरियों की तरफ से सभा भवन के मुख्य गेट पर चार ताले सीकड के साथ लगा दिए। पुलिस प्रशासन द्वारा रोकने पर याचिकाकर्ता दिनेश प्रजापति ने कहा जब हम सब लोग अंदर नहीं जा सकते तो अब यह लोग भी अंदर नहीं जाएंगे। अगर गेट पर लगाया गया ताला दबंगों द्वारा टूटता है तो इसकी सारी जिम्मेदारी क्षेत्रीय चौकी  लल्लापुरा और थाना सिगरा का होगा। 

याचिकाकर्ता दिनेश प्रजापति ने पुलिस आयुक्त वाराणसी और जिलाधिकारी वाराणसी से निवेदन किया है कि माननीय हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जाए और संस्था का चुनाव कराया जाए। जब तक चुनाव नहीं हो जाता है, तब तक ना हम लोग अंदर जाएंगे ना यह लोग अंदर प्रवेश करेंगे। अगर किसी भी प्रकार संस्था के प्रांगण में आवाजाही होती है तो मजबूरन याचिकाकर्ता को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी बात को रखने के लिए स्वतंत्र होगा।