भरत चले चित्रकूट हो रामा, राम को मनाने।
वाराणसी। 8 जून, अखिल भारतीय सनातन समिति जैतपुरा द्वारा मां बागेश्वरी देवी के प्रांगण में आयोजित संगीतमय रामकथा के आठवें दिन पूज्य संत बालक दास जी महाराज ने कहा कि प्रभु राम के वन गमन पर भैया भरत ने परिवार के साथ गुरु वशिष्ठ व राजा जनक को लेकर प्रभु राम को अयोध्या लौट आने के लिए काफी अर्जी लगाई तथा वन में माता सीता और लक्ष्मण को देखकर पूरा समाज काफी रोमांचित हो उठा। महाराज जनक तो काफी दुखी हुए और प्रभु राम ने बहुत ही जल्द वनवास से लौट आने की बात कह कर सबको विदा किया। पुनः रास्ते में ताड़का एवं सुबाहु का वध करते हुए पंचवटी में उन्होंने घास फूस की एक झोपड़ी बनाकर निवास करने लगे। रास्ते में जो भी संत मिलते गए उनका कुशलक्षेम एवं आशीर्वाद लेते हुए माता शबरी के आश्रम में पहुंचकर उसके भक्ति के वश होकर प्रभु ने उसके द्वारा दिए गए जूठे बेर को खा कर उसे संतुष्ट किया और आगे बढ़े। रास्ते में जंगल में प्रभु ने मारीच का उद्धार भी किया। तत्पश्चात रावण की बहन सुपर्णखा का नाक कान का छेदन करते हुए मानो प्रभु राम ने सीधे युद्ध के लिए रावण को चुनौती दी।
मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।

