Kashi ka News. गौरी केदारेश्वर के अर्चक धुल्लीपल्ला नारायण शास्त्री के आचार्यात्व में भव्य राम विवाह का आयोजन संपन्न।

गौरी केदारेश्वर के अर्चक धुल्लीपल्ला नारायण शास्त्री के आचार्यात्व में भव्य राम विवाह का आयोजन संपन्न।

ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। दिनांक 22 जनवरी, काशी के केदारघाट स्थित गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर के अर्चक धुल्लीपल्ला नारायण शास्त्री के संयोजन में आज सोमवार को केदार घाट पर भव्य श्री राम-जानकी विवाह उत्सव का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक धुल्लीपल्ला नारायण शास्त्री ने बताया कि कुमारस्वामी मठ, केदारघाट के पंडा एवं महंत परिवार, माझी समाज व क्षेत्रीय नागरिकों के सहयोग से अयोध्या में भव्य राममंदिर लोकार्पण एवं प्रभु श्रीराम लला के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अभिजीत मुहूर्त पर काशी में केदारघाट पर राम विवाह उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। 

उन्होंने बताया कि काशी के सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान पंडित अनंत भट्ट के आचार्यत्व में सर्वप्रथम गणपति पूजन, पुण्यावाचन के साथ वाल्मीकि रामायण के विवाह प्रसंग श्री राम पट्टाभिषकम का पारायण, यज्ञोपवीत धारण, कन्यादान एवं सभी विग्रहों का षोडशोपचार पूजन व श्रीराम सहस्त्रनाम से अर्चन किया गया। तत्पश्चात चारों वेदों के 21 प्रमुख वैदिक विद्वानों ने चतुर्वेद पारायण किया। उन्होंने कहा कि महामंगल आरती एवं पुष्पांजलि के बाद प्रीति भोज का आयोजन किया गया एवं श्रद्धालु भक्तों के बीच लड्डू प्रसाद का वितरण किया गया। सायं श्री गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर एवं केदार घाट पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ। 

इस अवसर पर कुमार स्वामी मठ के प्रमुख मुथु कुमार स्वामी, प्रबंधक शेखर जी, संपत कुमार, पंडा समाज के आनंद प्रकाश दुबे पप्पू गुरु, डॉ अभिषेक कुमार, महेश तिवारी, के रामकृष्ण शास्त्री, चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चेल्ला सुब्बाराव शास्त्री, श्रृगेरी मठ के प्रबंधक चेल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद ,चेल्ला जगन्नाथ शास्त्री, वैदिक विद्वान आर शिवकुमार शास्त्री, राजा तिवारी तथा माझी समाज के प्रदीप साहनी, अमित साहनी, पप्पू साहनी,ज्ञनंदलाल माझी, रतन साहनी, बाबू साहनी, गोपाल निषाद, रवि निषाद सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम में विवेक यादव,सोनू यादव, मौसम यादव, विजय यादव, अनूप यादव आदि ने प्रमुख रूप से सक्रिय सहयोग किया। 

संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन व कार्यक्रम संयोजक धुल्लीपल्ला नारायण शास्त्री ने किया।