Kashi ka News. इस बार काशी तमिल संगमम् 3.0 महर्षि अगस्त्य को समर्पित हैं- सीएम योगी

इस बार काशी तमिल संगमम् 3.0 महर्षि अगस्त्य को समर्पित हैं- सीएम योगी

ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना

वाराणसी। दिनांक 16 फरवरी, काशी-तमिल संगमम् 3.0 कार्यक्रम का विधिवत् उद्घाटन शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े गंगा घाट 'नमो घाट' पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एवं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण व संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ एल मुरुगन की उपस्थिति में बटन दबाकर किया। इस बार काशी तमिल संगमम् महर्षि अगस्त्य को समर्पित है। इनके जीवन चरित्र पर आधारित एक चित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन नमो घाट पर किया गया हैं।     

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा उनकी प्रेरणा से काशी तमिल संगमम् कार्यक्रम का लगातार तीसरी बार वाराणसी में हो रहा है। आए मेहमानों का काशीवासियों, प्रदेशवासियों विशेषकर प्रधानमंत्री की ओर से स्वागत किया। तमिलनाडु से आए मेहमानों को 144 वर्ष पर प्रयागराज में लगे महाकुम्भ एवं 500 वर्ष बाद अयोध्या में बने रामलला का दर्शन कराया जाएगा। नए भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए महर्षि अगस्त्य को केंद्र में रखकर इस बार के काशी तमिल संगमम् का थीम रखा गया है। राम को माता सीता को खोजने एवं राम-रावण युद्ध में 'आदित्य स्त्रोत' देने वाले महर्षि अगस्त्य है। शिक्षक, लेखको के साथ ही उद्योग, व्यापार, मंदिर की व्यवस्था करने वाले आदि लोग इस बार इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। देश को पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण को जोड़ने का कार्य जो कभी शंकराचार्य ने किया था, वहीं कार्य आज के परिवेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'काशी तमिल संगमम्' कार्यक्रम के माध्यम से एक भारत श्रेष्ट भारत की परिकल्पना को साकार कर रहे है। देश की सबसे पुरानी नगरी काशी हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को वाराणसी, प्रयाग तथा अयोध्या की संस्कृति से जुड़ने का सौभाग्य मिलेगा। उन्होंने काशी के बारे में उल्लेखित करते हुए बाबा विश्वनाथ, बाबा काल भैरव, माँ गंगा, माँ विशालाक्षी के बारे में भी उल्लेख किया। काशी प्राचीन समय से ही ज्ञान की राजधानी रही है तथा तमिलनाडु का प्राचीन ग्रंथ भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है उन्होंने महर्षि अगस्त्य के सिद्ध चिकित्सा के बारे में बोलते हुए कहा की आप सभी को इससे जुड़ने का मौका मिलेगा। उन्होंने सभी का हृदय से स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का ये विजन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अतिथियों को इस बार बाबा विश्वनाथ दर्शन, महाकुंभ मेला तथा अयोध्या स्थित राममंदिर में दर्शन करने को मिलेगा। राममंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद आयोजित इस तमिल समागम के अतिथि भी भाग्यशाली हैं की आपको दर्शन का सौभाग्य मिलेगा। इस बार का महाकुंभ न केवल भारतीय बल्कि पूरे दुनिया के सनातनियों में नयी ऊर्जा का संचार किया है। तमिल के पांड्या साम्राज्य द्वारा काशी के बारे में प्राचीन में उल्लिखित शब्दों को उल्लेख करते हुए एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को चरितार्थ किया। उन्होंने बताया की इस बार छह ग्रुप में तमिलनाडु से अतिथियों का आगमन होगा जिनको काशी, प्रयाग तथा अयोध्या की संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इस बार तमिल समागम अगस्त्य ऋषि पर पूरी तरह फोकस रहेगा जिनकी तिथि को सरकार राष्ट्रीय सिद्ध दिवस के रूप में मनाती है। उन्होंने बजट में उल्लेखित नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी तथा 22 भाषाओं के डिजिटल कुम्भ के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पंच प्रण को पुनः दोहराते हुए 2047 तक विकसित भारत की बात कही तथा राष्ट्रीय हित ही हमारी हित है को दोहराया। 

इस अवसर उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु', जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, पूर्व मंत्री तथा विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक डॉ अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ सुनील पटेल, सदस्य विधान परिषद हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र राय, अश्विनी त्यागी, केंद्रीय शिक्षा सचिव विनीत जोशी, मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी एस राजलिंगम, अपर पुलिस आयुक्त एस चिनप्पा, कार्यवाहक कुलपति बीएचयू डॉ संजय कुमार समेत भारी संख्या में तमिल अतिथि उपस्थित रहे।