सुदामा मित्रता और भक्ति का अदभुत संगम -बृजेश गोस्वामी
ब्यूरो चीफ़ आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। दिनांक 22 मार्च, सुदामा मित्रता और भक्ति का अदभुत संगम है, सुदामा वही है जिसने इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो, जो भजन में अनुरक्त हो। भक्त के जीवन मे ही परीक्षाएं आती है, विपरीत परिस्थितियों में भी अपने ठाकुर को जो ना भूले वहीं सच्चा भक्त है। सुदामा इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है। उक्त उदगार शनिवार को पं बृजेश गोस्वामी ने महमूरगंज स्थित श्रृंगेरी पीठ मठ में मारवाड़ी युवा मंच गंगा शाखा की ओर से चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिन कथा श्रवण कराते हुए व्यक्त किये।
श्री बाँकेबिहारी मंदिर, वृन्दावन के शयन भोग सेवा अधिकारी पं बृजेश गोस्वामी ने सुदामा चरित्र की भावपूर्ण कथा का श्रवण कराया तो कथा प्रांगण में उपस्थित सभी कथाप्रेमियों की आंखों से झर झर आंसू बह निकले।
उन्होंने कहा कि जब कोई महापुरुष किसी के घर जाता है तो वे पानी से पैर साफ करते है लेकिन भगवान कृष्ण सुदामा के पैर तो अपने आँसूवो से धो देते है। दीन हीन का इस दुनिया में कोई नही होता है, उनके सिर्फ दीनानाथ होते है। भगवान कभी रोए नही, वें तो सुदामा के भाव मे रो दिए। भागवत का एक एक श्लोक कल्याणकारी है और उसमें ॐ जोड़ दे तो वह मंत्र बन जाता है। भागवत जीवन को संवार देती है, भवसागर को पार लगा देने वाली कथा है। काशी मोक्ष की भूमि है जबकि वृन्दावन आनन्द की भूमि है।
कथा के समापन पर ब्रज की होली का आनन्द काशीवासियों को मिला। व्यासपीठ से पं बृजेश गोस्वामी ने 'आज बृज में होली रे रसिया', 'ऐसो चटक मटक हो ठाकुर तीनो लोक में कोहू ना' आदि भजनों का गान किया तो भक्तों ने एक दूसरे पर गुलाब और अन्य सुगंधित पुष्पों की वर्षा कर होली खेली।मुख्य यजमान आनन्द स्वरूप अग्रवाल ने देव स्वरूप झाँकी की आरती उतारी।
इस मौके पर अवधेश खेमका, रवि अग्रवाल, आनन्द प्रकाश डोरोलिया, महेश चौधरी, सुरेश तुलस्यान, कृष्ण कुमार काबरा, भरत अग्रवाल, श्याम मनोहर लोहिया स्मिता लोहिया आदि शामिल रहे। सप्ताहव्यापी श्रीमद भागवत कथा के समापन पर रविवार को त्रिदेव मन्दिर सेवक परिवार द्वारा 'दरबार साँवरे का' सायंकाल 7 बजे से संगीतमय आयोजन किया जाएगा जिसमें भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियों से ठाकुर जी की आराधना की जायेगी।
