Kashi ka News. शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री दरबार मे श्रद्धालुओं का रेला।

 शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री दरबार मे श्रद्धालुओं का रेला।

ब्यूरो चीफ़ आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी मे शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व है। माता की उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। माता शैलपुत्री का अतिप्राचीन मंदिर अलईपुरा क्षेत्र मे है। माता के मंदिर मे सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी "जय जगदंबे" और "जय माता दी" के उद्घोष से परिसर गूंजयमान हो उठा। शास्त्रो मैं वर्णित है कि पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेकर माता शैलपुत्री ने अवतार लिया और बाद में यही स्वरूप पार्वती के नाम से भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी बनीं। नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालु गणो द्वारा बड़ी संख्या में माता के मंदिर मे भोर से ही दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने नारियल, फूल-मालाएं और चुनरी अर्पित कर माता की आराधना कर सुख शांति की कामना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां शैलपुत्री महान उत्साह और शक्ति प्रदान करने वाली देवी हैं। उनकी पूजा से भय का नाश होता है, यश-कीर्ति, धन और विद्या की प्राप्ति के साथ-साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। काशी मे नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री के दर्शन से आरंभ हो गया जो नौ दिनों तक माता के विभिन्न रूपों की श्रद्धालुओं द्वारा आराधना होगी।