Kashi ka News. लोकगीत भावों के प्रकटीकरण का सुन्दर माध्यम-डॉ श्रुति उपाध्याय

 लोकगीत भावों के प्रकटीकरण का सुन्दर माध्यम- डॉ श्रुति उपाध्याय

ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। आकाशवाणी के वाराणसी केंद्र में संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की सहायक प्रवक्ता (संगीत गायन) डॉक्टर श्रुति उपाध्याय ने "लोकगीतों की पोटली को सहेजती संस्कृति "नामक विषय पर अपना व्याख्यान गायन सहित प्रस्तुत किया।

जिसमें उन्होंने लोक संस्कृति की विशेषताएं उनका विकास, वर्तमान समय में उनकी स्थिति और भविष्य में उनके संरक्षण और संवर्धन हेतु विभिन्न विषयों पर चर्चा की। विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि लोकगीत में भी गायन की अनेक विधाएं हैं लोकगीतों में हमारे मनोवृत्तियों का प्रकटीकरण होता है! कहीं विरह, कहीं हर्ष तो कहीं भक्ति भावना की भी अभिव्यक्ति होती है। 

आज की नई पीढ़ियों को भी लोकगीतों से परिचित कराने की आवश्यकता है। इससे पूर्व भी डॉ श्रुति उपाध्याय के निर्देशन में संगीत सीख रहे कई छात्र छात्राओं ने आकाशवाणी वाराणसी पर वसंत पंचमी के अवसर पर संगीतमय प्रस्तुति दी है। काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव में भी आपके निर्देशन में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संगीत के छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय स्तर और जिला स्तर पर जीत दर्ज कर विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि पर परिवार में हर्ष व्याप्त है और डाॅ श्रुति उपाध्याय को बधाई दी गई है।