Kashi ka News. कुलपति प्रो शर्मा ने बताया माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान-जप-तप का महात्म्य।

 कुलपति प्रो शर्मा ने बताया माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान-जप-तप का महात्म्य।

ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने जन-सामान्य को अवगत कराते हुए कहा कि भारतीय सनातन परम्परा में माघी पूर्णिमा का पर्व धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना तथा सामाजिक समरसता का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं पुण्यदायक पर्व है। यह पर्व माघ मास के पुण्यकाल में सम्पन्न होता है, जिसे शास्त्रों में ‘माघमासो महापुण्यप्रदायकः’ कहकर विशेष महिमा प्रदान की गई है।

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि माघी पूर्णिमा न केवल गंगा-स्नान, दान, जप, तप एवं व्रत का विशिष्ट अवसर है, अपितु यह पर्व भारतीय लोकजीवन में करुणा, दया, सेवा एवं समत्व की भावना को सुदृढ़ करता है। इस दिन संगमों, तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से आत्मिक शुद्धि एवं लोक-कल्याण का भाव जाग्रत होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार माघी पूर्णिमा को किया गया स्नान-दान सहस्रगुणित फल प्रदान करता है। विशेषतः अन्नदान, वस्त्रदान, तिलदान, घृतदान एवं स्वर्णदान का अत्यधिक महत्त्व बताया गया है। यह पर्व साधना, संयम एवं आत्मानुशासन की परम्परा को पुष्ट करता है। शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन किया गया पुण्यकर्म जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की सिद्धि में सहायक होता है। माघी पूर्णिमा भारतीय समाज में सामूहिकता, सेवा-भाव एवं लोकमंगल की भावना को जाग्रत करती है। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में यह पर्व लोकाचार, परम्परा एवं सांस्कृतिक एकात्मता का सशक्त प्रतीक है। मेले, धार्मिक सभाएँ, प्रवचन, भण्डारे तथा सेवा-कार्य इस पर्व को सामाजिक सहभागिता का उत्सव बना देते हैं।

विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग द्वारा प्रदत्त प्रामाणिक गणनाओं के अनुसार इस वर्ष माघी पूर्णिमा का विशेष पुण्ययोग दिनांक 1 फरवरी (रविवार) को सूर्योदय से उदयमान रहेगा। धर्मशास्त्रीय सिद्धान्त “यां तिथिं समनुप्राप्य उदयं याति भास्करः, सा तिथि: सकला ज्ञेया स्नान-दान-जपादिषु” के अनुसार यह तिथि स्नान-दान हेतु अत्यन्त प्रशस्त मानी गई है। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ: 1 फरवरी, प्रातः 05:53 बजे। पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 2 फरवरी 2026, प्रातः 03:39 बजे। कुल अवधि: 21 घंटे 46 मिनट।धर्मशास्त्रीय दृष्टि से माघी पूर्णिमा के स्नान-दान काल का वर्गीकरण इस प्रकार है, सर्वश्रेष्ठ काल, प्रातः 05:53 –10:59, उत्तम काल 11:00–15:56, 1/2 फरवरी सायं 18:14–प्रातः 3:39, मध्यम काल 1फरवरी 15:57–17:26, 2 फरवरी 2026 प्रातः 3:40 – 6:41, विशेष ज्योतिषीय संयोग इस वर्ष सूर्य के मकर राशि में तथा चन्द्रमा के कर्क राशि में पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित होने से अत्यन्त पुण्यप्रद योग का निर्माण हो रहा है। विशेष रूप से 1 फरवरी को प्रातः 5:53 से 10:59 तक पुनर्वसु नक्षत्र एवं प्रीति योग के कारण स्नान-दान का फल कई गुणा बढ़ जाता है। कुल मिलाकर इस वर्ष 21 घंटे 46 मिनट का अत्यन्त श्रेष्ठ पुण्यकाल प्राप्त हो रहा है।कुलपति ने श्रद्धालुओं से आह्वान जी किया कि वे माघी पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर शास्त्रीय विधि से स्नान-दान, जप-तप एवं सेवा-कार्य कर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करें तथा समाज में धर्म, सद्भाव एवं मानवीय करुणा के विस्तार में सहभागी बनें।