यूजीसी कानून विरोध करने वालों पर हो कठोर कार्यवाही- अशोक विश्वकर्मा
ब्यूरो चीफ आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने यूजीसी इक्विलिटी रेगुलेशन एक्ट का उच्च वर्ग द्वारा किए जा रहे विरोध की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह एक्ट वंचित वर्ग की ऐतिहासिक जीत है।
उन्होंने कहा की उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं कर्मियों के साथ जातिगत भेदभाव होता रहा है। यूजीसी के नए रेगुलेशन के प्रभावी होने से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर रोक लगाना संभव हुआ है। इस एक्ट के चलते अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाले सामाजिक बहिष्कार पक्षपात पूर्ण मूल्यांकन छात्रावासों में अलगाव तथा जानलेवा उत्पीड़न से मुक्ति मिलेगा। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू पुराना रेगुलेशन एक्ट अपर्याप्त था, जिससे व्यापक उत्पीड़न की घटनाओं के चलते कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया इसी क्रम में रोहित वेमुला और पायल तडवी के साथ हुए दर्दनाक अमानवीय हादसे ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति भेदभाव और व्यापक उत्पीड़न की घटनाओं की परिस्थितियों के पराकाष्ठा को उजागर किया। जिसके परिणाम स्वरूप उनके परिजनों द्वारा न्याय के लिए किए गए कानूनी संघर्ष के फलस्वरूप यूजीसी एक्ट के रूप में ऐतिहासिक सामाजिक सुरक्षा कानून सामने आया है। जिसका विरोध सामंतवादी मानसिकता के वर्चस्ववादी लोग कर रहे हैं, जो "जीयो और जीने दो" तथा समानता के संवैधानिक नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया शिक्षा मंत्रालय के एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2023 तक केंद्रीय विश्वविद्यालय आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, जैसे शिक्षण संस्थानों में कुल 98 छात्रों ने आत्महत्या की. आंकड़े बताते हैं कि वंचित वर्ग के छात्रों में तनाव अलगाव और भेदभाव के कारण तनाव और अवसाद ने उन्हें आत्महत्या के लिए विवश किया। सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस सूर्यकांत और जोयमलया बागची की बेंच ने रेगुलेशन में सख्त प्रावधान करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट रूप से कहा है की रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसी घटनाओं को दोहराने से रोकना जरूरी है। मानवता और समानता का दमन करने वाले वर्चस्ववादी ताकतों को शर्म नहीं आती वह आज भी दमन का अधिकार जारी रखना चाहते है, जिसे अब बहुसंख्यक और बहुजन वर्ग स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा है कि यूजीसी के नाम पर विरोध करने वाले लोग देश में अमन-चैन और शांति भंग कर जाति संघर्ष को बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि यूजीसी एक्ट का विरोध करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।

