विगत 20 दिनों में योगी के कालनेमि होने के ही मिले हैं संकेत- अविमुक्तेश्वरानंद
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। स्वयं को 'असली हिन्दू' सिद्ध करने हेतु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम के 20 दिन कल ही पूर्ण हो चुके हैं। पर इस समय में आदित्यनाथ ने अभी तक अपने हिन्दू होने के कोई संकेत नहीं दिये हैं अपितु कालनेमि होने के ही संकेत मिले है। आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि जनमानस का यह स्पष्ट मत है कि किसी भी विरक्त व्यक्ति अथवा महंत को किसी धर्मनिरपेक्ष पद पर पूर्णकालिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सन्यास की मर्यादा के प्रतिकूल है।
विशेष रूप से, गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले किसी भी योगी या संन्यासी के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से मांस व्यापार जैसी गतिविधियों में संलिप्त होना सर्वथा अनुचित और अधार्मिक है। अतः हम समस्त अखाड़ों, महामंडलेश्वरों और महंतों का यह आह्वान करते हैं कि वे आगे आएं और शास्त्र सम्मत तर्कों के साथ इन कृत्यों की व्याख्या करें। यदि ये कृत्य शास्त्र सम्मत सिद्ध नहीं किए जा सकते, तो योगी आदित्यनाथ के इन कार्यों को ढोंग की श्रेणी में क्यों न रखा जाए? अब समय आ गया है कि संत समाज इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
उन्होने कहा कि इन 20 दिनों की प्रतीक्षा में सरकार ने 'गोदान' फिल्म को टैक्स-फ्री करने जैसा प्रतीकात्मक कार्य तो किया, लेकिन हमारी मुख्य मांगों- 'गाय को राज्य माता घोषित करने' और 'गो-मांस (बीफ) निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध' पर मौन साधे रखा। मनोरंजन को कर-मुक्त करने से कत्लखानों में कटती गोमाता की रक्षा नहीं होगी। सरकार का प्रथम कर्तव्य गोमाता को संवैधानिक सम्मान देना था, न कि पर्दे पर समाधान खोजना। महाराज ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि मुख्यमंत्री गोरक्षा पर तो 'मौन' हैं, लेकिन हमारे 'शंकराचार्य' होने के शास्त्रसम्मत सत्य पर 'मुखर' होकर सदन में पद की गरिमा को गिरा रहे हैं। धर्मपीठ की प्रामाणिकता किसी राजकीय प्रमाण-पत्र की मोहताज नहीं है। हम आदित्यनाथ जी से कहना चाहेंगे कि सदन में दूसरों पर प्रश्नचिह्न लगाने के बजाय स्वयं के हिन्दू होने पर बोलने के शब्द जुटाना शुरू करें। महाराज ने देशभर के गोभक्तों से आह्वान किया है कि वे 11 मार्च को लखनऊ पहुंचने की तैयारी शुरू करें, अब गोमाता को उसका अधिकार दिलाकर ही यह आन्दोलन थमना चाहिये।


