स्वामी श्रद्धानंद जयन्ती पर कार्यकर्ता संगोष्ठी व कार्यशालाका आयोजन।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा आर्य भूमि भारत व माँ भारती के स्वतंत्रता के लिए महान स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी, महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनन्य भक्त एवं परम शिष्य, दलितोद्धारक, लाखों हिन्दुओं को शुद्ध कर पुनः घर वापसी के नायक, गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के पुनरोद्धारक, कल्याण मार्ग के पथिक, जामा मस्जिद से प्रथम बार वेद मंत्र को बोलकर सबके कानों को पवित्र करने वाले, हिन्दी के प्रबल पक्षधर, गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार व अन्य गुरुकुलों के संस्थापक, स्त्री शिक्षा के प्रचारक, वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित अमर बलिदानी स्वामी श्रद्धानन्द की 170वीं जन्म जयन्ती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी, कार्यकर्ता गोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ आर्य समाज भोजूवीर वाराणसी में प्रातः कालीन वैदिक यज्ञ से हुआ। यज्ञ का आचार्यत्व आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय संचालक आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने किया।
स अवसर पर यजमान आर्य रवि प्रकाश बरनवाल व यशोदा बरनवाल सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश से पधारे आर्य जनों के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि व सार्वदेशिक आर्य वीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नन्दकिशोर आर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन वैदिक धर्म की रक्षा तथा सत्य स्वरूप के प्रचार हेतु महर्षि दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की तथा इसके लिए युवा पीढ़ी में वैदिक संस्कार एवं राष्ट्र भक्ति के संचार के लिए सन् 1929 में आर्य वीर दल की स्थापना की गई। आज वर्तमान समय में युवाओं में बढ़ती नशा प्रवृत्ति एवं नैतिक पतन से समाज को बचाने के लिए आर्य वीर दल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण एवं कार्यकारिणी चयन कार्यशाला का आयोजन संपन्न हुआ । कार्यशाला में पूर्वी उत्तर प्रदेश की 6 कमिश्नरियों एवं 22 जनपदों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता कीं।
इस अवसर पर विधिवत कार्यकारिणी का चयन कर पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। कार्यशाला का कुशल मार्गदर्शन आचार्य नंदकिशोर आर्य के सान्निध्य में दो सत्रों में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रान्तीय संचालक प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ ने की तथा संयोजन एवं संचालन आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में संगठन की वर्तमान स्थिति,चुनौतियाँ एवं भावी योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र में आचार्य देवव्रत आर्य (बस्ती), गरुण ध्वज पाण्डेय (बस्ती), दिनेश आर्य (हमीरपुर), इंदल आर्य (चंदौली), सत्येंद्र आर्य (वाराणसी) एवं वीरेंद्र आर्य (टांडा, अंबेडकर नगर) ने अपने विचार व्यक्त किएँ । अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रमोद आर्य ने कहा कि किसी भी संगठन की प्रगति उसके समर्पित, प्रशिक्षित एवं सैद्धांतिक रूप से दक्ष कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है। आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने बताया कि 22 मई से 30 मई 2026 तक बलिया में प्रान्तीय आर्य वीर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 6 कमिश्नरियों एवं 22 जनपदों से 250 से अधिक आर्य वीर सहभागिता करेंगे । इसके अतिरिक्त 7 जून से 14 जून 2026 तक प्रान्तीय आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भी प्रस्तावित है । बैठक में आर्य वीर दल के शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 100 नई शाखाओं के गठन का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में कमल सिंह आर्य, संजीत आर्य, राजेश आर्य, सागर आर्य, इंदल आर्य, चंद्रदीप आर्य, वेद प्रकाश, आनंद आर्य, वेद प्रकाश बृजवासी, अशोक आर्य, राकेश विद्यालंकार, विजय आर्य, वीरेंद्र आर्य सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहें।कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


