वरिष्ठ कवि इंजि0 राम नरेश को मिला "महात्मा ज्योतिबा राव फूले साहित्य सम्मान"।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। दिनांक 8 मार्च को नव प्रवाह साहित्यिक मंच मधुपुर, ग्राम सभा साहिजनी कला खुर्द में नव प्रवाह साहित्यिक मंच के चतुर्थ समागम के उपलक्ष्य में भव्य कवि सम्मेलन और होली मिलन समारोह सम्पन्न हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि हरिवंश सिंह बवाल ने किया। इस कार्यक्रम में उपस्थित कवियों ने अपनी हास्य व्यंग्य के साथ-साथ ओज और गम्भीर रचनाओं से श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।
नव प्रवाह साहित्यिक मंच ने अपनी परंपरा कायम रखते हुए वरिष्ठ कवि का ’महात्मा ज्योतिबा राव फूले साहित्य सम्मान 2025’ राजकुमार ’राजन’ को तथा युवा कवि का’ बाबू जगदेव प्रसाद युवा गौरव साहित्य सम्मान 2025’ से यथार्थ विष्णु को विभूषित किया। कार्यक्रम की शुरुआत गोपाल कुशवाहा के वन्दना से हुआ। कार्यक्रम में फूलपुर प्रयागराज से आये युवा शायर शरीक मखदूम फुलपुरी ने सुनाया "दुश्मनों को गले से लगाते रहो, यूं मोहब्बत से होली मनाते रहो।" बक्सर के हास्य व्यंग्य के धुरंधर कवि हेहर ने सुनाया कि जब से आंख गड़बड़ायिल, कुछ लखाते नयिखे। मेहर आपन हई कि दोसरा के चिन्हाते नायिखे।
काशी के वरिष्ट कवि इंजि0 राम नरेश "नरेश" ने सुनाया "बबुआ पढत ना ऐसन सुंदर आपन संविधान। कवि डॉ छोटेलाल सिंह "मनमीत" ने सुनाया कि जब देखो रील देखने में मस्त हैं सभी, लेकिन किताब देखने का वक्त नहीं हैं। कवि गोपाल कुशवाहा ने सुनाया कि आग पानी में लगाते हैं लगाने वाले, चैन से यार रहेंगे न जमाने वाले। वरिष्ठ कवि प्रद्युम्न त्रिपाठी ने सुनाया" तिरंगा तुझे हम कभी झुकने नहीं देंगे,मिट जायेंगे खुद तुझे मिटने नहीं देंगे।शायर राधेश्याम पाल ने सामाजिक विद्रूपता पर व्यंग करते हुए सुनाया कि तूं अगड़ा मैं पिछड़ा ये हिंदू वो मुस्लिम, सियासत ने घोला जहर धीरे धीरे। युवा शायर अजय कुमार विमल ने अपने गजलों से लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया "यूं जी रहें हैं दोस्तों दहशत के दौर में, ताला लगा के मुंह पे हुकूमत के दौर में। शायर मनीष सिंह आवारा ने अपने सुमधुर वात्सल्य गीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर लिया यादों की पुरवाई अक्सर धो देती है आंखो को, मां तुम भी तो रोती होगी बैठी चांद सितारों में। युवा कवि प्रमोद कुमार निर्मल ने हास्य की फुलझड़ियों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। हास्य के धुरंधर कवि बन्धुपाल बन्धु ने सुनाया कि घरवां वाली प्रधान हो गयिल से लोगों को खूब हंसाया। राजेश विश्वकर्मा राजू ने सुनाया कि दिल से दिल के मिलाला फागुन ह, सबके आपन बनाला फागुन ह। कार्यक्रम का संचालन नाथ सोनांचली एवं संयोजन विजय कुमार मौर्य ने किया।


