नारी की सहभागिता से ही सुदृढ़ होगा राष्ट्र निर्माण- कुलपति
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-प्रचार अभियान” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र की आधारशिला है और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी है। मुख्य अतिथि प्रचार्या डॉ मिथिलेश सिंह अग्रसेन महिला पीजी कॉलेज ने कहा कि नारी शक्ति वंदन के संदर्भ में काशी की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा की ‘नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ का उच्चारण किया जाता है, जिसमें नारी और पुरुष को एक-दूसरे के पूरक रूप में स्वीकार किया गया है। यह मंत्र इस बात का प्रतीक है कि सृष्टि और समाज के संतुलन में स्त्री और पुरुष दोनों की समान एवं संयुक्त भूमिका है। नारी को पुरुष के साथ जोड़कर देखा जाना ही भारतीय संस्कृति की उस उच्च भावना को प्रकट करता है, जहाँ दोनों मिलकर जीवन के पूर्णत्व का निर्माण करते हैं।
विशिष्ट अतिथि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की प्रचार्या डॉ नीलम गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि अवसर और मंच भी मिलना आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।नोडल अधिकारी प्रो विद्या कुमारी एवं विभिन्न वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण, समान अधिकार एवं सामाजिक समता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। संचालन डॉ श्रृंगध्रा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुमिता ने किया।


