सनातन धर्म में तिलक, रुद्राक्ष व शिव नाम का है विशेष महत्व- पं अमर बिहारी
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। भगवान शिव की नगरी काशी में श्री भागवत चार धाम सेवा समिति कोलकाता के द्वारा महमूरगंज स्थित बालाजी पैलेस सभागार में आयोजित सप्त दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के समापन के अवसर पर कथावाचक पंडित अमर बिहारी पाठक महाराज ने तिलक, रुद्राक्ष और भगवान शिव के नाम का वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर दिया।
संस्था के आनंद अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, राजकुमार गोयल, दीपक रुगटा, श्रवण अग्रवाल, जितेंद्र अग्रवाल, मुरारी केडिया, संजय लोहिया एवं तुलसीराम राजगढ़िया ने संयुक्त रूप से बताया कि यह संस्था सीनियर सिटीजन को कथा के माध्यम से उनमें नई ऊर्जा व नई चेतना का संचार करवाना मुख्य उद्देश्य है। विगत 30-35 सालों से भारत देश के विभिन्न धर्म-स्थानों में रामायण, भागवत, शिव पुराण की कथा करवा चुकी है, आगे देवी भागवत करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हमने कोलकाता में पाकुड़िया सालासर धाम के नाम से एक सालासर हनुमान जी का मंदिर बनवाया है, जिसमें सालासर थाम की ज्योति इस मंदिर में आज भी 24 घंटे जलती है और तीन-चार बार सवा लाख हनुमान चालीसा का पाठ भी हो चुका है। हर साल जनवरी में विक्रम द्वारा रामचरितमानस का पाठ होता है तथा 51 कुंडों पर 251 विप्रो द्वारा छ सौ सुंदरकांड के श्लोक द्वारा हवन हुआ जो नौ दिनों तक चला था।
उन्होंने बताया कि विश्व में जो युद्ध माहौल है उसकी शांति के लिए हम लोग पाकुड़िया सालासर धाम में सवा करोड़ हनुमान चालीसा करवाने का संकल्प लिए हैं जो दिवाली के बाद घोषणा करेंगे ताकि पूरे विश्व में एक सनातन का डंका बजे और विश्व में शांति स्थापित हो। कथा मे काशी के गणमान्य एवं कोलकाता, दरभंगा, सूरत, दिल्ली, गुवाहाटी, बेंगलुरु आदि से सैकडों भक्तगण शामिल थे।


