Kashi ka News. सेवा,सह-अस्तित्व व करुणा भारतीय जीवन-दर्शन की मूल भावना-कुलपति

 सेवा,सह-अस्तित्व व करुणा भारतीय जीवन-दर्शन की मूल भावना-कुलपति

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृतविद्या विभाग एवं एवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में भीषण ग्रीष्म ऋतु से व्याकुल पशु-पक्षियों के संरक्षण एवं सेवा हेतु “सकोरा अभियान” के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थलों पर सकोरे एवं शीतल जल-पात्र स्थापित किए गए।

इस अवसर पर कुलपति ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति एवं समस्त प्राणियों के प्रति करुणा, संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना को अत्यंत महत्त्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि “पशु-पक्षियों एवं समस्त जीवों के प्रति संवेदना ही भारतीय जीवन-दर्शन की मूल आत्मा है। भीषण गर्मी के इस समय में जीवों के लिए जल की व्यवस्था करना केवल सेवा नहीं, अपितु मानवता एवं संस्कार का परिचायक है।” उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।

इस अवसर पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘जीवेषु दया’ की भावना को सर्वोच्च नैतिक मूल्यों में स्थान प्राप्त है। कार्यक्रम में विभाग के अनेक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा भविष्य में भी ऐसे सेवा-प्रधान एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया। अंत में डॉ रविशंकर पाण्डेय ने समस्त विद्यार्थियों, सहयोगियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।