Kashi ka News. हिंदी पत्रकारिता राष्ट्र की आत्मा है-शशीन्द्र मिश्र

 हिंदी पत्रकारिता राष्ट्र की आत्मा है- शशीन्द्र मिश्र

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। हिंदी पत्रकारिता का शुभारंभ 30 मई 1826 को कलकत्ता से पं युगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित "उदन्त मार्तण्ड" से हुआ। यह केवल एक समाचार पत्र नहीं था, बल्कि भारतीय जनचेतना, स्वभाषा के सम्मान और समाज जागरण का प्रथम सशक्त स्वर था। उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी शशीन्द्र मिश्र ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में व्यक्त किया। 

हिंदी पत्रकारिता दिवस हमें उन पत्रकारों के योगदान का स्मरण कराता है, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को दिशा देने, जनमानस को जागरूक करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य किया। पत्रकारिता केवल समाचारों का संप्रेषण नहीं, बल्कि सत्य, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की सतत साधना है। हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक चेतना की अभिव्यक्ति है। 

हिंदी पत्रकारिता राष्ट्र की आत्मा को जनमानस से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। आज सभी पत्रकार बंधुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ, जो निष्पक्षता, निष्ठा और जनहित की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उनकी लेखनी समाज को प्रकाश देने वाले दीपक के समान है।