केंद्रीय मंत्री पूरी द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी अशोभनीय -राघवेंद्र चौबे
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी में आयोजित दिशा समिति की बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी द्वारा पत्रकारों एवं छायाकार को बाहर करवाना बेहद निंदनीय, अलोकतांत्रिक और सत्ता के अहंकार का परिचायक है। पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी की ओर से हमने स्थानीय सांसद प्रधानमंत्री मोदी से मांग की थी कि वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दिशा समिति की बैठक में शामिल होकर जनता से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा करें। लेकिन बारह वर्षों बाद जब दिशा समिति की बैठक आयोजित हुई, तब उसमें लोकतांत्रिक पारदर्शिता और मीडिया सम्मान की जगह सत्ता का अहंकार देखने को मिला।
पत्रकार केवल बैठक की शुरुआती फोटो और वीडियो कवरेज कर रहे थे, जो वर्षों से चली आ रही सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बावजूद पत्रकारों को बाहर निकालने का निर्देश देना साफ दर्शाता है कि भाजपा सरकार और उनके मंत्री हरदीप सिंह पूरी सवालों से डरते हैं। आज पूरा देश देख रहा है कि “एपेस्टीन फाइल” को लेकर भाजपा और हरदीप पुरी किस प्रकार घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि कहीं एपेस्टीन फाइल का सच जनता के सामने न आ जाए, पत्रकार सवाल न पूछ लें और उनके काले कारनामों का राज उजागर न हो जाए। इसी डर और बौखलाहट में पत्रकारों को दिशा समिति की बैठक से बाहर कराया गया। पत्रकारों को बाहर करना और सवालों से भागना इस बात को और मजबूत करता है कि एपेस्टीन फाइल में हरदीप पुरी का नाम निश्चित रूप से दर्ज है और उस काले कृत्य के गुनहगारों में उनकी भी भूमिका रही है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर मीडिया और कैमरों से इतनी बेचैनी क्यों? आखिर जनता और पत्रकारों के सवालों का सामना करने से भाजपा और उसके मंत्री क्यों बच रहे हैं ? मंत्री जी यह समझना होगा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता किसी सरकार की कृपा पर नहीं चलती।
पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जनता की आवाज है और जनता के सवाल पूछना उसका अधिकार भी है और कर्तव्य भी। पत्रकारों और छायाकार बंधुओं के साथ इस प्रकार की बदसलूकी कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। हम केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, भाजपा नेतृत्व एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मांग करते हैं कि वे सार्वजनिक और लिखित रूप से वाराणसी के पत्रकारों से माफी मांगें। कांग्रेस पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता कलम के प्रहरियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और लोकतंत्र की आवाज दबाने की हर कोशिश का सड़क से लेकर सदन तक विरोध करेगा।


