बाबा विश्वनाथ दरबार को कारपेट मॉडल पर चलने का प्रयास- राघवेन्द्र चौबे
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में एक मई से लागू की जा रही ऐप आधारित व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इसे आस्था पर प्रहार बताते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को व्यापार का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे काशी की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी, जहां हर गली में शिव का वास माना जाता है, जहां सदियों से संत, महात्मा, विद्वान, तपस्वी और करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाते आए हैं, वहां अब आस्था को प्रशासनिक आदेशों और डिजिटल बाधाओं में कैद करने की कोशिश की जा रही है। सरकार के इशारे पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं एसडीएम मंदिर प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार है। यहां दर्शन व्यवस्था कभी मोबाइल ऐप, पासवर्ड और तकनीकी जाल पर आधारित नहीं रही। लेकिन वर्तमान प्रशासन ने बाबा के दरबार को कॉरपोरेट मॉडल पर चलाने का प्रयास शुरू कर दिया है, जिन अधिकारियों की नियुक्ति श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था के लिए की गई थी, वही अधिकारी आज स्वयं को बाबा के दरबार का मालिक समझकर फरमान जारी कर रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
बाबा के दरबार में प्रवेश का अधिकार हर भक्त को समान रूप से मिलना चाहिए, न कि ऐप और प्रशासनिक अनुमतियों के आधार पर यदि यह तुगलकी आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस पार्टी, काशीवासी, संत समाज और बाबा के भक्त व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे। सड़कों से लेकर मंदिर मार्ग तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होगा और इस जनविरोधी व्यवस्था को वापस लेने तक संघर्ष जारी रहेगा। कांग्रेस पार्टी काशी की आस्था, संस्कृति, प्राचीनता और जनाधिकारों की रक्षा के लिए हर संघर्ष करेगी। बाबा विश्वनाथ का दरबार भक्तों का है, जनता का है। इसे गुजराती व्यापार, वसूली और प्रशासनिक अहंकार का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।


