पं हीरालाल मिश्र मधुकर को चंद्रा साहित्य परिषद का मिला सर्वोच्च सम्मान।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। सनातन काव्य- धारा वाराणसी द्वारा इंदिरा नगर समीप चितईपुर में अखिल भारतीय स्तर की काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। कोलकता, मध्य प्रदेश एवं स्थानीय कवियों द्वारा वरिष्ठ कवि पं हीरालाल मिश्र मधुकर की अध्यक्षता, विशिष्ट अतिथि द्वय डॉ वेद प्रकाश पांडेय, विजय शंकर पांडेय तथा परम हंस तिवारी 'परम' के संचालन में रचनाकारों ने सुंदर काव्य पाठ किया।
भोजपुरी, हिंदी एवं काशिका में रचनाएँ पढ़कर कवियों ने देश की एकता, अखंडता और समरसता का संदेश दिया। इस काव्य गोष्ठी में हिंदी साहित्य के संवर्धन और विकास में अनुकरणीय योगदान के लिए ख्यातिलब्ध साहित्यकार-काशी की शान संपादक कविताम्बर, निदेशक-विश्व हिंदी शोध- सम्वर्धन अकादमी वाराणसी के हीरालाल मिश्र मधुकर को संस्था के अध्यक्ष गिरीश पांडेय काशिकेय और चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी0 राम नरेश "नरेश" द्वारा चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मधुकर ने जहाँ कविता को जीवंत रखने के लिये अच्छे साहित्य लेखन की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के बढ़ते कदम की सराहना की। इसी क्रम में कलकत्ता से आये भोजपुरी के कवि राम पुकार सिंह "पुकार गाजीपुरी" को चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) द्वारा प्रसस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और "मड़ये की हरदी" पुस्तक देकर चंद्रा साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। गौरी शंकर तिवारी, प्रमोद कुमार मौर्य, गोपाल केशरी, टीका राम आचार्य, विजय चंद त्रिपाठी, दिनेश दत्त पाठक, संजीव तिवारी आदि उपस्थित रहे। सुमधुर अल्पाहार और परम हंस तिवारी परम द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के बाद काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।


