Kashi ka News. प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हाउस अरेस्ट करना लोकतंत्र की हत्या-राघवेंद्र चौबे

 प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को हाउस अरेस्ट करना लोकतंत्र की हत्या- राघवेंद्र चौबे 

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय सहित कांग्रेस के कई नेताओं को अयोध्या में कथित रूप से हाउस अरेस्ट किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र, संविधान और विपक्ष की आवाज़ को कुचलने का प्रयास है।

राघवेंद्र चौबे ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में प्रभु श्री रामलला के दर्शन करने तथा अयोध्या में जनहित से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दों को उठाने जा रहा था, लेकिन देर रात बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उन्हें होटल में ही रोक दिया गया। इतना ही नहीं, अयोध्या से जुड़े आसपास के जनपदों के जिलाध्यक्षों, शहर अध्यक्षों तथा अनेक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी उनके घरों एवं ठिकानों पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया, ताकि वे कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल न हो सकें।

यह पूरी कार्रवाई बताती है कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों से भयभीत है। यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो विपक्ष के नेताओं को रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? लोकतंत्र में जनता के चुने हुए राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण कार्यक्रम करने का पूरा अधिकार है। पुलिस और प्रशासन का राजनीतिक दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज़ दबाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।भाजपा सरकार मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में अपने शीर्ष स्तर से जुड़े लोगों को बचाने में लगी हुई है। लेकिन कांग्रेस इस पूरे मामले को जनता के बीच उठाती रहेगी और कथित गड़बड़ियों को बेनकाब करने का काम करेगी। जनता सब देख रही है और सच सामने आने का इंतजार कर रही है। विपक्ष किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही की मांग करता रहेगा।विपक्ष की आवाज़ को हाउस अरेस्ट और पुलिसिया कार्रवाई से दबाया नहीं जा सकता। कांग्रेस पार्टी अन्याय, भ्रष्टाचार और लोकतंत्र पर हो रहे हर हमले के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते है कि प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित सभी कांग्रेस नेताओं पर की गई कार्रवाई का कारण सार्वजनिक किया जाए, लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाए तथा विपक्ष को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने से रोकने की प्रवृत्ति तत्काल बंद की जाए।