Kashi ka News. भाजपा का "आक्रोश सभा", कांग्रेस की जनपक्षीय आवाज़ों से भय का परिणाम है-राघवेंद्र चौबे

 भाजपा का "आक्रोश सभा", कांग्रेस की जनपक्षीय आवाज़ों से भय का परिणाम है- राघवेंद्र चौबे

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित तथाकथित “आक्रोश सभा” पर महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा का तथाकथित आक्रोश कार्यक्रम उसकी राजनीतिक घबराहट और कांग्रेस की जनपक्षीय आवाज़ों से भय का परिणाम है। यह आक्रोश सभा नहीं, बल्कि भाजपा की बौखलाहट, घबराहट और राजनीतिक हताशा का सार्वजनिक प्रदर्शन है। आज देश और प्रदेश की जनता अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है। महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और कमजोर वर्गों , छात्र, किसान , महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। महोबा की दलित बिटिया को न्याय दिलाने के लिए भाजपा ने कब आक्रोश व्यक्त किया? प्रदेश में बढ़ते अपराध, हत्याओं और महिलाओं की असुरक्षा के खिलाफ उसकी कोई आक्रोश सभा क्यों नहीं हुई? लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े नीट पेपर लीक मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधलियों से युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। लेकिन भाजपा के नेताओं को इन मुद्दों पर सड़क पर उतरने की फुर्सत नहीं मिली। 

बेरोजगारी अपने चरम पर है, शिक्षित नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन भाजपा को युवाओं के दर्द से कोई सरोकार नहीं है देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। जनता महंगाई की मार झेल रही है, लेकिन भाजपा का आक्रोश कभी महंगाई के खिलाफ दिखाई नहीं देता। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार किसानों की समस्याओं पर भी मौन है।प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी अनेक बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद शहर में यातायात अव्यवस्था, जलभराव, गंदगी, टूटी सड़कें और विभिन्न परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना और वैचारिक मतभेद का सम्मान होना चाहिए। लेकिन भाजपा विपक्ष को दुश्मन मानकर उसकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। जनता अब समझ चुकी है कि भाजपा का आक्रोश चुनिंदा मुद्दों तक सीमित है, जबकि कांग्रेस हर पीड़ित, हर शोषित और हर वंचित नागरिक की आवाज़ बनने का कार्य कर रही है।चयनात्मक आक्रोश नहीं, बल्कि जनहित के हर मुद्दे पर समान संवेदनशीलता और जवाबदेही ही लोकतंत्र की असली पहचान है। भाजपा को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक नौटंकी बंद कर जनता के वास्तविक सवालों का जवाब देना चाहिए। देश और प्रदेश की जनता आने वाले समय में इस अहंकार और जनविरोधी राजनीति का लोकतांत्रिक जवाब देगी।