भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा महोत्सव को लेकर बृजेश सिंह ने की प्रेस वार्ता।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की राजधानी काशी एक बार फिर असि स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाला रथयात्रा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम बनेगा। काशी की पहचान शैव और वैष्णव परंपराओं के अद्भुत समन्वय के रूप में भी है। असि स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को श्रीक्षेत्र पुरी धाम का प्रतीकात्मक स्वरूप माना जाता है।
उक्त जानकारी ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान देते हुए बताया कि ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1790 में पुरी से भगवान श्री जगन्नाथ का दिव्य विग्रह काशी लाया गया था, वर्ष 1802 से यहां भव्य रथयात्रा की परंपरा निरंतर चली आ रही है। यह आयोजन आज भी शापुरी वंशजों द्वारा श्रद्धा और सेवा भाव से संपन्न कराया जाता है। महोत्सव की शुरुआत 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान के महास्नान एवं जलाभिषेक से होगी। इसके बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान अनवसर काल में रहेंगे।
इस दौरान भगवान के स्वास्थ्य लाभ की परंपरा के अनुसार औषधीय काढ़े का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। 14 जुलाई को भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को प्रथम दर्शन देंगे। 15 जुलाई को असि स्थित मंदिर से भव्य डोली यात्रा निकलेगी, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए रथयात्रा क्षेत्र पंडित बेनीराम बाग पहुंचेगी। इसके बाद 16 से 18 जुलाई तक ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का आयोजन होगा, जहां भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। 19 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान पुनः अपने मंदिर लौटेंगे तथा 20 जुलाई से नियमित दर्शन-पूजन प्रारंभ हो जाएगा। अध्यक्ष बृजेश सिंह ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और काशी की इस गौरवशाली सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा को सफल बनाने की अपील की है।


