भाविप द्वारा योग व यज्ञ पर कार्यशाला।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। भारत विकास परिषद् काशी प्रदेश प्रान्त उत्तर मध्य क्षेत्र-द्वितीय के नीलकण्ठ शाखा ने बच्चों के सर्वांगीण विकास व संस्कारवान बनाने के लिए ब्रह्मकुमारी शिक्षण संस्थान, महमूरगंज में
सनातन संस्कृति व संस्कार के कार्यशाला द्वितीय दिवस पर योग व यज्ञ/हवन पर जागरूक किया। पाँच दिवसीय ग्रीष्म कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर शाखा की गतिविधि संयोजक संस्कार की आहुति सिंह ने गायत्री मंत्र को अर्थ सहित बताया।
शाखाध्यक्ष रवि प्रकाश बरनवाल ने बच्चों को यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को अवगत कराते हुए कहा कि गायत्री मंत्र बोलकर व घी के दीपक को जलाने से सकारात्मक उर्जा का प्रभाव बढ़ता है, जिससे मन को शान्ति मिलती है । और भी यज्ञ के वैज्ञानिक दृष्टि के बारे में जानकारी हेतु पर्चे वितरित किए व उस पर्चे को बच्चों से पढ़वाकर यज्ञ के महत्व को कोरोना काल तथा भोपाल गैस त्रासदी से अवगत कराया।
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान प्रमोद आर्य आर्षेय ने बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान देते हुए कहा कि किस ईश्वर की पूजा व उपासना करनी चाहिए इसके लिए सोहनलाल माहेश्वरी जी की सरल कविता जिसने सूरज चांद बनाया से समझा जा सकता है। इस कार्यक्रम में शिक्षा संस्थान की मुख्य शिक्षिका विमला सिंह, अध्यापिकाएँ व अध्यापक, प्रान्तीय गतिविधि सहसंयोजक संस्कार के पंकज पटेल उपस्थित रहें व बच्चों को बिस्किट के पैकेट वितरित किए।


