रामकथा मे राम वनवास प्रसंग को सुन श्रद्धांलु भावविभोर।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। अखिल भारतीय सनातन न्यास जैतपुरा वाराणसी द्वारा आयोजित राम कथा के सप्तम दिवस पर पातालपुरी पीठाधीश्वर संत जगतगुरु बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि चारों पुत्रों और बहू को देखकर राजा दसरथ बहुत ही आनंदित हुए। गुरु वशिष्ट से जेष्ठ पुत्र प्रभु राम को अयोध्या का राजतिलक करने की बात उनसे कहीं गुरु जी ने राजा दशरथ से जाकर राजमहल में इसकी पूरी तैयारी करने के लिए कहां परंतु विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था। महारानी कैकेयी ने भरत को अयोध्या का राजा तथा राम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
तब राजा ने लाख रानी कैकई को समझाया पर वह नहीं मानी तब राजा ने राम को बुलाकर वनवास की बात बताई, प्रभु राम ने पिता की आज्ञा शिरोधार्य किया और तीनों रानियां से आज्ञा मांगकर प्रभु राम के साथ माता सीता एवं लक्ष्मण वन को चल दिए।
अंत में व्यास पीठ की आरती आयुष मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र दयालू, रवि शंकर सिंह, कुसुम लता सिंह, किशोर सेठ, डॉ अजय जायसवाल, जयशंकर गुप्ता, बिंदु लाल गुप्ता, दिव्यांश गुप्ता, रवि प्रकाश, विनीत कुमार, कैलाश नाथ, रवि नंदन तिवारी, तृप्ति तिवारी, गीता चौबे, पिंकी गुप्ता पं इंदुशेखर तिवारी भईया, प्रमोद यादव मुन्ना, वतन कुशवाहा ने उतारी। मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।


