Kashi ka News. आदर्श काव्य सरिता की 21वीं काव्य गोष्ठी हुई संपन्न।

 आदर्श काव्य सरिता की 21वीं काव्य गोष्ठी हुई संपन्न।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। माह के प्रत्येक पहले रविवार को आदर्श पुस्तकालय खोजवां द्वारा आयोजित होने वाली काव्य गोष्ठी काव्य सरिता की 21वीं काव्य गोष्ठी में नगर के श्रेष्ठ रचनाकारों ने उत्कृष्ट काव्य पाठ किया। 

वरिष्ठ कवि विजय शंकर पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि गौरीशंकर तिवारी तृप्त थे। आरंभ में युवा कवि आनंद कृष्ण मासूम ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। उन्होंने सुनाया "हे जगतारिणी, हे अविनाशिनी, हे शरणागत वत्सल" तत्पश्चात रामानंद दीक्षित ने "जिन्हें हम हार समझे थे, सजने सजाने को।वही अब नाग बनकर दौड़ते हैं, काट खाने को"।। गणेश प्रहरी ने बरसात पर आधारित रचना सुनाई "ताल तलैया पोखर कुआं, पानी बिन सब सूना है"। कवयित्री ऋतु दीक्षित "हे लेखनी तू क्यूं बंद पड़ी है"। गज़लकार डॉ प्रताप शंकर दूबे ने सुनाया "जगना- सोना एक बराबर होता है।पाना खोना एक बराबर होता है"।। 

वरिष्ठ गीतकार कुंवर सिंह कुंवर ने सुनाया "पूछ रहे हैं कैसे पत्ते सूख गए। इस मौसम में अच्छे अच्छे सूख गए"।। इस अवसर पर डॉ विंध्याचल पांडेय सगुन, ब्रजेन्द्र अग्रहरि, परमहंस तिवारी परम, गिरीश पांडेय काशिकेय आदि रचनाकारों ने उत्कृष्ट काव्य पाठ किया। संचालन नागेश शांडिल्य, धन्यवाद ज्ञापन संरक्षक सूर्य प्रकाश मिश्र ने किया।