‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या विभाग द्वारा भारतीय ज्ञान-परम्परा के महान मनीषी एवं धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज द्वारा रचित कालजयी ग्रन्थ ‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ की समसामयिक प्रासंगिकता पर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं व्याख्यान-विमर्श का आयोजन योगसाधना केन्द्र में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में देशभर से उपस्थित विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय एवं पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में स्वामी करपात्री के वैचारिक अवदान पर गंभीर एवं सारगर्भित विमर्श किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि ‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ केवल मार्क्सवादी विचारधारा का प्रतिवाद नहीं, बल्कि भारतीय राज्य-दर्शन, सामाजिक समरसता, आर्थिक न्याय तथा धर्माधिष्ठित लोकव्यवस्था का एक प्रामाणिक दार्शनिक घोष है। स्वामी करपात्री ने भारतीय शास्त्र-परम्परा के आलोक में मार्क्सवाद की मूल अवधारणाओं का तार्किक एवं शास्त्रीय विश्लेषण करते हुए सिद्ध किया कि भारतीय जीवन-दृष्टि का आधार संघर्ष नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य, समन्वय, न्याय एवं लोकमंगल है। भगवान श्रीराम सम्पूर्ण मानवता के आदर्श, नीति-निर्देशक एवं धर्म के साक्षात् विग्रह हैं। रामराज्य व्यक्ति की गरिमा, नैतिक उत्तरदायित्व, न्यायपूर्ण शासन तथा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की भावना पर आधारित आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण है।
मुख्य अतिथि स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री का सम्पूर्ण साहित्य भारतीय सनातन ज्ञान-परम्परा का सजीव एवं प्रामाणिक स्वरूप है। रोहित कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी करपात्री ने ‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ में मार्क्सवाद के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक पक्षों की भारतीय दृष्टि से सूक्ष्म एवं तथ्यपरक समीक्षा की है। संगोष्ठी के संयोजक डॉ रविशंकर पाण्डेय ने कहा कि स्वामी करपात्री भारतीय दार्शनिक परम्परा के उन विरल आचार्यों में हैं जिन्होंने शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर आधुनिक विचारधाराओं का गम्भीर परीक्षण किया। प्रारम्भ में मंगलाचारन एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती तथा करपात्री के तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो राजनाथ, प्रो विद्या कुमारी चंद्रा, डॉ विजय कुमार शर्मा, डॉ जितेन्द्र धर द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अनेक आचार्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


