Kashi ka News. रोजगार और खाने की आज़ादी पर हमला बर्दाश्त नहीं-राघवेंद्र चौबे

 रोजगार और खाने की आज़ादी पर हमला बर्दाश्त नहीं- राघवेंद्र चौबे 

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। बनारस में नगर निगम वाराणसी द्वारा बनारस में मीट मांस मछली बेचने पर रोक के मुद्दे पर मीट मछली व्यवसायियों ने विपक्षी पार्षदों के अगुवाई मे कांग्रेस, आप, एपवा और सामाजिक/व्यवसायिक संगठन के साथ नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल से मिलकर वार्ता हुई और एक ज्ञापन पत्र भी सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नगर निगम का तर्क पूरी तरह विरोधाभासी है। यदि लाइसेंसधारी दुकानों से धार्मिक नगरी और पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं है, तो बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं से ही परेशानी होने का दावा कैसे किया जा सकता है? सच्चाई यह है कि वर्षों से लाइसेंस जारी करना और उनका नवीनीकरण करना स्वयं नगर निगम की जिम्मेदारी रही है। 

प्रशासनिक विफलता की सजा गरीब मेहनतकश लोगों को नहीं दी जा सकती। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी मछली और मांस व्यापार से जुड़ी है। इनमें मल्लाह, निषाद, बंगाली, मुस्लिम तथा अन्य मेहनतकश समुदाय शामिल हैं। धार्मिक भावनाओं के नाम पर इन समुदायों को शहर से बाहर धकेलने की कोशिश है। 

हम पार्षद स्पष्ट करना चाहते हैं कि वाराणसी किसी एक खान-पान, एक संस्कृति या एक समुदाय का शहर नहीं, बल्कि विविधताओं और सह-अस्तित्व की नगरी है। गरीबों के रोजगार और नागरिकों की खाने की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नगर निगम ने अपने भेदभावपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा और शहर का मेहनतकश समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से राघवेंद्र चौबे, संजीव सिंह, अब्दुला खान, कुसुम वर्मा, धनंजय, गुलशन अली, मनीष शर्मा, रोजा मैथ्यूज, रमज़ान अली, सुमित सोनकर, सनी सोनकर, ओकास अंसारी, प्रदीप राजभर, तुफैल अंसारी आदि लोग शामिल रहे।