Kashi ka News. शंकराचार्य नरेंद्रानंद के सानिध्य में अखंडानंद तीर्थ की षोडशी व श्रद्धांजलि सभा संपन्न।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद के सानिध्य में अखंडानंद तीर्थ की षोडशी व श्रद्धांजलि सभा संपन्न।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। अस्सी के डुमराव बाग कॉलोनी स्थित काशी सुमेरु पीठ अखाड़े के 99 वर्षीय तपस्वी अखंडानंद तीर्थ के देहत्याग के उपरांत षोडशी व श्रद्धांजलि सभा, साधु संगोष्ठी एवं साधू भंडारे का आयोजन जगद्गुरु शंकराचार्य सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में साधू-संत-महात्मा, दंडी स्वामियों एवं श्रद्धालुओं ने तपस्वी अखंडानंद तीर्थ को श्रद्धांजलि अर्पित की। शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद महाराज ने कहा कि अखंडानंद तीर्थ का संपूर्ण जीवन तप, साधना, त्याग और सनातन धर्म के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा। उन्होंने अपना पूरा जीवन आध्यात्मिक साधना एवं धर्मसेवा में समर्पित किया। उनका देहावसान संत समाज और सनातन परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि संतों का शरीर नश्वर है, लेकिन उनके तप, ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक विचार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। भारतीय सनातन परंपरा में संतों का जीवन समाज को धर्म, सत्य, संयम और सेवा का संदेश देता है। अखंडानंद तीर्थ ने अपने जीवन में साधना और तपस्या के माध्यम से संत परंपरा को समृद्ध किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
गोष्ठी मे अन्य साधू-संत एवं वक्ताओं ने भी अखंडानंद तीर्थ के जीवन व उनके योगदान पर प्रकाश डाला। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित संतों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। गोष्ठी का समापन संतों के आशीर्वचन एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। संचालन स्वामी बृजभूषणानंद महाराज ने किया। इस अवसर पर महंत प्रकाश देव आश्रम बिजोलिया वीर, स्वामी मधुसूदन नर्मदा आश्रम, श्रवण देव पुष्कर मठ, मेजर ओंकार नाथ दुबे, जय भवन दीक्षित, नरेशानंद, अनंत विज्ञान मठ आदि मौजूद रहे। अवधेश दीक्षित ने संतों का माल्यार्पण कर आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम संयोजक रमाकांत दीक्षित रहे।


