Kashi ka News. सावन के सिंधारे में सजी राजस्थानी संस्कृति की रंगारंग झलक।

 सावन के सिंधारे में सजी राजस्थानी संस्कृति की रंगारंग झलक।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की विदिशा शाखा द्वारा 13 अगस्त 2026 को होटल मदीन में सावन के सिंधारे का रंगारंग कार्यक्रम ‘धरोहर’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज की पुरातन परंपराओं, राजस्थानी संस्कृति और तीज के उल्लास की सुंदर झलक देखने को मिली।

सावन के महीने में तीज के अवसर पर मारवाड़ी समाज में बहू-बेटियों का सिंधारा करने की बहुत पुरानी और प्रचलित परंपरा है। इस अवसर पर बहन-बेटियां सज-संवरकर आती हैं, नृत्य-गीत करती हैं और मनपसंद व्यंजनों का आनंद लेती हैं। इसी परंपरा को जीवंत रखने और महिलाओं को एक साथ उत्सव मनाने का अवसर देने के उद्देश्य से शाखा द्वारा ‘धरोहर’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में सभी सदस्याएं महारानियों की तरह पारंपरिक राजस्थानी परिधान और आभूषणों से सुसज्जित होकर शामिल हुईं। संस्था की अध्यक्षा सरोज तुलस्यान, सचिव प्रीति बाजोरिया, कोषाध्यक्ष चंदन खेमका, संयोजिकाओं मधु तुलस्यान ,मीनू पोद्दार एवं श्वेता केडिया ने सभी सदस्याओं का स्वागत किया।

कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। ‘बाजूबंद भूल आई’ गीत पर सुगंधा केजरीवाल, अनीता खेमका, खुशी सर्राफ एवं मनीषा खेमका ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। श्रृंगार रस को समर्पित ‘पांव में पायल’ गीत पर सुनीता जिंदल की मनमोहक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं।

राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनृत्य घूमर की सुंदर प्रस्तुति सुगंधा केजरीवाल, सुजाता बाजोरिया एवं शिवानी प्रीति ने ‘बाईसा घूमर घाले रे’ गीत पर दी। वहीं राजपूताना की वीरांगनाओं को समर्पित ‘योद्धा बन गई मैं’ नृत्य सुधा अग्रवाल, अनुराधा जालान, नैना अग्रवाल, नीलम अग्रवाल एवं अनीता अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इसके साथ ही शशि अग्रवाल, मधु तुलस्यान उषा तुलस्यान एवं शोभा द्वारा प्रस्तुत नाटिका ने भी सभी का मनोरंजन किया।

कार्यक्रम में विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। सबसे सुंदर एवं पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर आई सदस्याओं को रेड कार्पेट पर चलने का अवसर दिया गया। साथ ही विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट राजस्थानी एवं पारंपरिक व्यंजनों का सभी सदस्याओं ने आनंद लिया।

पूरे कार्यक्रम में सावन के गीतों, नृत्य, हंसी-खुशी और राजस्थानी संस्कृति के रंगों ने ऐसा समां बांधा कि होटल मदीन मानो राजपूताना की रंगीन विरासत में रंग गया।