विदुर जी भक्ति के श्रेष्ठ उदाहरण है -बालव्यास
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। भक्ति ऐसी करें कि जब हम घर मे पूजा कर रहे हों तो बाहर स्वयं ठाकुर जी दरवाजा खटखटा रहे हो, ऐसी ही भक्ति विदुर और विदुरानी जी की रही, उनकी भक्ति से भगवान उनके झोपड़े तक खींचे चले आये। उक्त उदगार प्रख्यात कथा मर्मज्ञ पं श्रीकांत शर्मा 'बालव्यास' ने बुधवार को महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरें दिन व्यक्त किये। श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति द्वारा आयोजित कथा में भक्ति की महिमा का बखान करते हुए बालव्यास ने कहा कि दुनिया भगवान को ढूंढती है लेकिन भगवान अपने भक्तों को याद करते है। विदुर जी की भक्ति भागवत में उत्कृष्ट भक्ति का उदाहरण है। विदुर की भक्ति यह संदेश देती है कि यदि आपके पास अभाव है तो उस अभाव में भी सिर्फ भगवत भजन जरूर करें। भगवान यह नही देखते की उन्हें भोग में छप्पन भोग लगा है, पकवान बने है या सूखी रोटी दी गयी है। वे तो बस अर्पित करने वाले के भाव देखते है।
बालव्यास ने कहा कि गृहस्थ आश्रम से बढ़कर कोई धर्म नही है, बशर्ते उसे नियम से निभाया जाएं। हानि-लाभ, जीवन - मरण और सुख - दुख सब साथ ही आते है, जबकि हम यह सोचते है कि जीवन मे सिर्फ सुख और लाभ ही रहे। जीवन मे जो कुछ घटित हो रहा है उसे ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करें। गृहस्थ आश्रम में सुख और आनन्द तभी रहेगा जब जीवन मे भजन रहेगा, तप रहेगा। जीवन में कभी विपत्ति आये तो निराश नही होना, विपदा को भी ईश्वर के रूप में देखो, विपत्ति को भगवत प्राप्ति का मार्ग बना ले तो बड़ी से बड़ी विपदा भी सम्पदा बन जाती है।
कथा में वाराणसी कैंट के विधायक सौरभ श्रीवास्तव, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, अनूप अग्रवाल, अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, पवन अग्रवाल, रमेश कसेरा, रविन्द्र मोदी, कौशल शर्मा, रवि जायसवाल, गोपाल अग्रवाल, जयकिशन केडिया, राजेश गट्टानी, रोहित सरावगी आदि विशिष्टजन उपस्थित रहे।व्यासपीठ की आरती कथा यजमान ओपी तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, भरत संथोलिया, उर्मिला सिंह आदि भक्तों ने उतारी। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।


