Kashi ka News. महापुरूष इमाम हुसैन को धर्मो की बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता।

 महापुरूष इमाम हुसैन को धर्मो की बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता। 

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। अंजुमन इमामिया की जानिब, अर्दली बाज़ार से निकलने वाले चेहलुम के जुलूस में जाकिरे अहलेबैत डॉक्टर अब्बास रज़ा नय्यर जलालपुरी लखनऊ तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हुसैन केवल एक इंसान नहीं बल्कि एक विचारधारा है। हिन्दू-मुसलमान होना ज़रूरी नहीं बल्कि इंसान होना जरूरी है। 

नय्यर जलालपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन व्यक्तित्व नहीं बल्कि उनके जैसे महापुरुषों को धर्म की बेड़ियों मैं नहीं बांधा जा सकता। जुलूस अपने निर्धारित मार्गो से होता हुआ मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़ा में समाप्त हुआ। एक मजलिस हुई जिसके बाद अमारी, ताबूत, अलम, दुलदुल का जुलूस निकला, जिसमें अंजुमन हुसैन, अंजुमन अंसारे हुसैनी, अंजुमन पैगामे हुसैनी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन इमामिया नौहा मातम करते चल रही थी। रास्ते में काले बैनरों पर सफेद अक्षरों से लिखें स्थान के महापुरुषों के श्लोक लोगों को आकर्षित कर रहे थे। जगह जगह सबील लगाकर स्वादिष्ट विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का वितरण किया जा रहा था। जुलूस मे हुसैनी झंडे के साथ तिरंगा भी लहरा था। 

मोमिनो का धन्यवाद जनरल सेक्रेटरी ज़फ़र अब्बास रिजवी ने किया। जुलूस में हाजी अबुल हसन, एजाज़ अब्बास, हाजी एस एम जाफर, शुजाअत हुसैन, इरशाद हुसैन, मेंहदी हसन कब्बन, कमर अली, राहिल नकवी, रईस आलम, अकबर मेहंदी, नबील हैदर, अमन मेंहदी, अमान हुसैन, ज़मन रिज़वी, दानिश, ताबीर, नाजिम हुसैन, रियायत हुसैन ने अहम भूमिका निभाई।