कथा के शुभारंभ पर श्रृंगेरी मठ से निकली पोथी यात्रा।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में सोमवार को महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में सप्ताहव्यापी श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा मर्मज्ञ बालव्यास पं श्रीकांत शर्मा ने अपने श्रीमुख से काशी में 37वीं कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि काशी में विश्वनाथ ही गुरु है, यहाँ जिसने गंगाजल ग्रहण कर लिया उसे कोई पराजित नही कर सकता है। भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में निवास करते है जबकि महादेव आनन्द वन में रमण करते है। महादेव की महिमा का बखान करते हुए बालव्यास ने कहा कि उनका नाम शिव ही इसलिए पड़ा क्योंकि वें मनुष्यों का कल्याण करने वाले है। जो सबका कल्याण करें वहीं शिव है, जो अव्यक्त है, अनंत है और अद्वितीय है वहीं शिव है। महादेव का एक स्वरूप अमरनाथ भी है जो यह शिक्षा देते है कि जो आया है उसे जाना ही है।
भागवत कथा महात्म्य का वर्णन करते हुए बालव्यास ने कहा कि यह कथा परमहँसियो की है, वीतरागियों की है, भगवान के प्रेमियों की है। स्वामी करपात्री महाराज जैसे संत 6 -6 माह तक भागवत कथा का श्रवण कराते थे। भागवत आनन्द प्रदान करने वाली कथा है, ईश्वर के तीन स्वरूप है सत, चित और आनन्द। यह आनन्द भोजन, प्रासाद और भौतिक संसाधनों में नही है बल्कि असली आनन्द भगवान के चिंतन, मनन और भजन में है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध को फेंटने से घी तैयार होता है उसी प्रकार भजन करने से जीवन मे असली आनन्द उत्त्पन्न होता है।
कथा के शुभारंभ पर पहले दिन महमूरगंज स्थित श्रृंगेरी मठ से विशाल पोथी यात्रा निकाली गई। कथा यजमान ओम प्रकाश तुलस्यान, संचित तुलस्यान, बैजनाथ भालोटिया, शुभम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, किशन भालोटिया, उर्मिला सिंह, भरत संथोलिया आदि भक्त सिर पर श्रीमद भागवत की पवित्र पोथी लिए हुए चल रहे थे। पीछे बैंड बाजे की धुन पर भक्ति में लीन होकर कथा प्रेमी चलते रहे। यात्रा महमूरगंज तिराहा होते हुए कथा स्थल पहुँच कर समाप्त हुई। इस अवसर पर मुख्य रूप से अवधेश खेमका, महेश चौधरी, सुरेश तुलस्यान, अशोक सराफ, गोपाल अग्रवाल, आनन्द स्वरूप अग्रवाल, अमित अग्रवाल, राजेश गट्टानी आदि उपस्थित रहे। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।


