Kashi ka News. शंकराचार्य नारायणा तीर्थ ने कर्म और उसके फल का बताया महत्व।

 शंकराचार्य नारायणा तीर्थ ने कर्म और उसके फल का बताया महत्व।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। अनंत श्रीविभूषित काशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज के पावन सान्निध्य में श्री काशीधर्म पीठ रामेश्वर मठ, अस्सी में चल रहे चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत आयोजित सत्संग श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के श्रीमुख से धर्मोपदेश का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

गुरुदेव भगवान ने कर्म और उसके फल के महत्व को समझाते हुए कहा कि यदि आप किसी को दुख देंगे तो वह दुख किसी न किसी रूप में वापस आपको मिलेगा। इसलिए मनुष्य को अपने कर्म, वाणी और व्यवहार के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। पूज्य गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे उसी के अनुरूप फल प्राप्त होता है। किसी को पीड़ा देना, अपमानित करना अथवा अन्याय करना अंततः स्वयं के जीवन में दुःख का कारण बन सकता है। इसके विपरीत प्रेम, करुणा, सेवा, सद्भाव और परोपकार से किए गए कर्म जीवन में सुख एवं शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि किसी के लिए दुख का कारण बनने के बजाय उसके सुख और कल्याण का माध्यम बनें। मनुष्य को अपने जीवन में सत्य, धर्म, करुणा, क्षमा और सदाचार को अपनाना चाहिए। अपने आचरण से किसी को कष्ट न पहुंचाना और जरूरतमंद की सहायता करना ही मानव जीवन की सार्थकता है। चातुर्मास महाव्रत के अंतर्गत रामेश्वर मठ में प्रतिदिन पादुका पूजन, गुरुदर्शन, सत्संग एवं प्रसाद वितरण का आयोजन निरंतर जारी है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मठ पहुंचकर पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं तथा चातुर्मास के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री काशीधर्म पीठ के कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी, नागेंद्र दुबे, रामाधार दुबे, सत्यनारायण शास्त्री सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे।