Kashi ka News. भक्तिव ज्ञान के बिना केवल कर्मकांड से जीवन पूर्ण नहीं होता-जगद्गुरु शंकराचार्य नारायणानंद तीर्थ

 भक्तिव ज्ञान के बिना केवल कर्मकांड से जीवन पूर्ण नहीं होता- जगद्गुरु शंकराचार्य नारायणानंद तीर्थ 

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

काशी। चातुर्मास महाव्रत के पावन अवसर पर रामेश्वर मठ में नित्य प्रति चल रहे सत्संग में अनंत श्रीविभूषित काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, कर्म और अहंकार के त्याग का गूढ़ आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया।


शंकराचार्य महाराज ने भक्ति और ज्ञान के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल कर्मकांड करने से मनुष्य का जीवन पूर्ण नहीं होता। कर्म के साथ श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का होना आवश्यक है। भगवान के प्रति प्रेम और अपने कर्मों में पवित्रता, इन दोनों का समन्वय ही जीवन को सार्थक बनाता है।


उन्होंने कहा कि ज्ञान मनुष्य को सही मार्ग का बोध कराता है, जबकि भक्ति उसके हृदय में भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव उत्पन्न करती है। जब ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म जीवन में एक साथ आते हैं, तब साधना सार्थक होती है।


अहंकार का त्याग आवश्यक

प्रवचन में महाराज ने अहंकार के त्याग को आध्यात्मिक जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य को परमात्मा से दूर करता है। व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है, उसमें परमात्मा की कृपा के साथ परिवार, समाज और अनेक लोगों का सहयोग भी सम्मिलित है।


उन्होंने कहा कि विनम्रता ही सच्ची साधना की पहचान है। जब मनुष्य अपने भीतर से अहंकार को कम करता है, तब उसके हृदय में भक्ति और ज्ञान के लिए स्थान बनता है। महाराज के पूर्व प्रवचनों में भी यह बताया गया है कि अज्ञान से अहंकार उत्पन्न होता है और अहंकार से संसार के प्रति आसक्ति बढ़ती जाती है। इसलिए ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान का निवारण और भक्ति के माध्यम से अहंकार का त्याग आवश्यक है।

सत्संग के दौरान कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी, आचार्य अनुज मिश्रा, राममणि सारस्वत, स्टेशन अधीक्षक सोनभद्र सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों ने गुरुदेव के श्रीमुख से आध्यात्मिक वचनों का श्रवण किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।