कलिकाल में अमृत के समान है श्रीमद भागवत- बालव्यास
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकान्त शर्मा बालव्यास ने कहा कि यदि कलियुग में अमृत का रसपान करना है तो भागवत कथा का श्रवण करें। इसमें अमृत भरा है, हम सभी को प्रभु की कथाओं को सदैव सुनते रहना चाहिए, यह कथा जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने का सर्वोतम साधन है। बालव्यास ने कहा कि भागवत की कथा कभी पुरातन नही हो सकती, यह नित नवीन है। जितने बार भी सुनेंगे उतनी बार भगवान की नई कथा ही लगेगी। यह कथा अनंत कोटि लाभ देने वाली कथा है, कथा श्रवण करने वाले को और कथा श्रवण कराने वाले दोनों को यह लाभ प्राप्त होता है। बालव्यास ने कहा कि ब्रज का चरित्र प्रेम का महायोग है। भगवान को धन की आवश्यकता नही है, उन्हें सिर्फ धर्म चाहिए। श्रीकृष्ण ने कंस को मारा धन के लिए नही, उसके साम्राज्य के लिए नही बल्कि उसके अधर्म से मुक्ति दिलाने को उसका संहार किया और मथुरा का सारा राजपाट अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया।
कथा में श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह पर भक्तों ने भावविभोर होकर नृत्य किया। आओ मेरी सखियां मुझे मेंहदी लगा दो जैसे अन्य गीतों पर भक्तों ने खूब नृत्य किया। इस अवसर पर विवाह की दिव्य झांकी का भी भक्तों ने दर्शन किया।
कथा में मुख्य रूप से अनूप सराफ़, अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, अजय यादुका, संजीव अग्रवाल, पवन अग्रवाल, अमित अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, राजेश गट्टानी, किशन केडिया, गोपाल अग्रवाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।


