Kashi ka News कमलात्मिका की आराधना मे विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।

 कमलात्मिका की आराधना मे विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित मां कमलात्मिका (कमला) को समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव एवं भौतिक सुख-सुविधाओं की अधिष्ठात्री माना जाता है। कमल पर विराजमान मां कमला शांति, सौभाग्य, संपन्नता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। महायज्ञ के दसवें दिन उनके पूजन के माध्यम से विश्व कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि, समाज में सुख-शांति तथा सभी श्रद्धालुओं के जीवन में मंगल एवं ऐश्वर्य की कामना की गई।

इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की साधना परंपरा में महाविद्याओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मां कमला केवल भौतिक संपन्नता की देवी नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, सद्बुद्धि, संतोष और धर्मसम्मत समृद्धि की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ एवं देवी उपासना का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ समस्त प्राणी जगत के कल्याण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रत्येक दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से शक्ति के विविध आयामों का स्मरण किया जा रहा है। मां कमलात्मिका की उपासना से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और लोकमंगल की भावना का विस्तार हो, यही इस अनुष्ठान की प्रमुख कामना है। पूजन के दौरान यज्ञ वेदी पर विशेष पूजन सामग्री से मां कमला का आवाहन एवं पूजन किया गया। इसके बाद विधिवत हवन करते हुए वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित की गईं। यज्ञ परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक मां कमलात्मिका के दर्शन-पूजन किए और विश्व शांति एवं जनकल्याण के लिए प्रार्थना की।

सहस्त्र चंडी महायज्ञ के क्रम में आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होंगे। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर यज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं। मौके पर विनय मिश्रा, पन्नालाल मिश्र सपत्नीक, सरोज अग्रवाल सपत्नीक के साथ ही महंत अवध बिहारी दास, महंत रामेश्वर दास, महंत विद्यभूषण दास, महंत कोतवाल मोहनदास, महंत भगवान दास, संतो महंतों ने यज्ञ का परिक्रमा कर यज्ञ में आहुतियां दिया और भगवती देवी का 16 प्रचार से पूजन, अर्चन, वंदन किया। बृजभूषणानंद , रामलखन नागा, सच्चिदानंद तिवारी यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी, विवेकनंद गिरि आदि उपस्थित थे।