शिक्षक हित व संगठन की मजबूती के लिए लड़ रही हूं चुनाव- ऋतिका दूबे
रिपोर्ट आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा की अधिकृत प्रत्याशी ऋतिका दूबे ने कहा कि उनका चुनाव लड़ने का उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं को सदन तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है। उक्त बातें मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में शिक्षकों से सही नेतृत्व चुनने और अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शिक्षक हित और शिक्षक संगठनों के अस्तित्व को बचाने का चुनाव है। शिक्षक बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं और अपने हितों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्हें तय करना है कि शिक्षकों की समस्याओं को सदन में कौन मजबूती से उठाएगा। प्रदेश के शिक्षा विभाग में महिला शिक्षिकाओं की भागीदारी करीब 45 प्रतिशत है। वह चुनाव में महिला प्रत्याशी के रूप में शिक्षिकाओं से समर्थन मांगा और कहा कि मैं आठ जिलों में जाकर शिक्षकों से संपर्क कर रही हूं। एक महिला के लिए यह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन शिक्षिकाओं और शिक्षकों के सहयोग से आगे बढ़ने का भरोसा है। उनकी पहली प्राथमिकता समान काम के लिए वेतन, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सेवा सुरक्षा नियमावली बनाने और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की मांग को सदन में उठाने का प्रयास करेंगी। मदरसों में नियुक्तियों पर लगी रोक को हटाने एवं संस्कृत विद्यालयों, मदरसों औरसीबीएसई-आईसीएसई बोर्ड से जुड़े शिक्षकों को भी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ दिलाना। ऋतिका दूबे ने कहा कि शिक्षक संगठन पिछले करीब दो दशकों से अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं। इसका असर शिक्षकों की मांगों और अधिकारों की लड़ाई पर पड़ा है। यदि शिक्षक एकजुट नहीं हुए तो राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से शिक्षक संगठनों का अस्तित्व कमजोर हो सकता है। उनका कहना था शिक्षक संगठनों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है, ताकि वे सरकार के सामने शिक्षकों की मांगों को प्रभावी ढंग से रख सकें। नामांकन नहीं करने, पर्चा वापस लेने और किसी प्रत्याशी को समर्थन देने की चर्चाओं पर ऋतिका दूबे ने कहा कि इस तरह की बातें उनका मनोबल गिराने के लिए फैलाई गईं। वह सभी चुनौतियों का सामना करते हुए चुनाव मैदान में डटी हैं और शिक्षकों के मुद्दों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने अन्य प्रत्याशियों के राजनीतिक दलों से जुड़ने पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिक्षक संगठनों के माध्यम से शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ना अधिक जरूरी है। अंत में उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि 23 अक्टूबर को छुट्टी मनाने के बजाय मतदान केंद्र पहुंचें और ऐसे नेतृत्व का चुनाव करें, जो उनकी समस्याओं को सदन में मजबूती से उठा सके।
SOURCE: PRATYASHI RITIKA DUBEY KI PRESS CONFERENCE.



