नशा मुक्त युवा-विकसित भारत के संकल्प के साथ निकली भव्य साइकिल यात्रा।
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत के लिए संकल्प अभियान’ के अंतर्गत गुरुवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग मुख्य भवन से नशामुक्ति एवं युवा-जागरूकता का सशक्त संदेश देते हुए एक भव्य साइकिल यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर और मन को ही दुर्बल नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक शक्ति को भी प्रभावित करते हैं। स्वस्थ, संस्कारवान, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की वास्तविक शक्ति और उसकी सबसे सुदृढ़ आधारशिला है। कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल यात्रा को रवाना किया। सैकड़ों साइकिल सवार युवा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से प्रस्थान कर लहुराबीर, आजाद पार्क, मैदागिन चौराहा, पटेल धर्मशाला एवं तेलियाबाग होते हुए पुनः मुख्य भवन की ओर रवाना हुए। युवाओं के हाथों में ‘नशा मुक्त भारत’, ‘युवा जागो, नशा भागो’, ‘नशा मुक्त भारत–स्वस्थ भारत’ सहित विभिन्न प्रेरणादायी संदेशों से युक्त तख्तियां एवं बैनर रहे। मार्ग में युवाओं ने लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए स्वस्थ, संस्कारित एवं उत्तरदायी समाज के निर्माण का संदेश दिया। आयोजकों ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर से निकली यह साइकिल यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यापक एवं दीर्घकालिक जन-जागरूकता अभियान का शुभारम्भ है। 100 सप्ताह तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी संकल्प अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग और विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इस क्रम में खेलकूद प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों तथा विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा अपनी ऊर्जा को रचनात्मक एवं राष्ट्रहितकारी गतिविधियों में लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो विधु द्विवेदी, प्रो राजनाथ, प्रो दिनेश कुमार गर्ग, डॉ मधुसूदन मिश्र, डॉ विजेन्द्र कुमार, डॉ नितिन कुमार, डॉ दुर्गेश पाठक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।


