गौमाता व धर्म की रक्षा हेतु हर संभव प्रयास करूंगा-अविमुक्तेश्वरानंद
रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना
वाराणसी। वर्तमान समय में काशी में विराजे ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य पीठाधीश्वर अतुलेश्वर धाम इंद्रप्रस्थ, जगद्गुरु रामानुजाचार्य अवधेशानंद महाराज पीठाधीश्वर ओम शांति धाम नई दिल्ली, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी सारंगधराचार्य पीठाधीश्वर सारंग मंदिर प्रयाग, वैष्णव स्वामी चंद्रप्रकाशाचार्य वैष्णव आश्रम मुंबई, धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे एवं अनिरुद्ध रामानुज दास पंडित दिनेश शर्मा आदि संतों ने दर्शन, भेंट कर शंकराचार्य से आध्यात्मिक विषयों पर विमर्श कर उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया एवं संतों ने शंकराचार्य को अंगवस्त्रम, भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद तथा डॉ अंकिता द्वारा रचित सनातन शाश्वत नामक पुस्तक भेंट कर उनको सम्मानित किया। तत्पश्चात समस्त संतों ने एक स्वर से शंकराचार्य द्वारा धर्म एवं गौरक्षार्थ किए जा रहे संघर्षों का भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री के पश्चात आपने धर्म एवं गौमाता के रक्षा हेतु विपरीत परिस्थितियों में सत्ता एवं अधर्मियों के धर्मविरुद्ध नीतियों के विरुद्ध परिणाम का परवाह किए बिना संघर्ष कर सनातनियों में जो अलख जगाई है वह वन्दनीय है। समस्त संत समाज आपके हर कदम पर आपके साथ है और आपके आह्वान करने पर हमलोग किसी भी तरह का बलिदान देने हेतु तत्पर हैं। इस अवसर पर शंकराचार्य ने संतों, भक्तों को अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि हम पद की शोभा बढ़ाने हेतु नही बल्कि धर्म की रक्षा हेतु शंकराचार्य बने हैं। हमारे धर्म की मूल गौमाता की हत्या होती रहे, धर्म की हानि होती रहे और मैं चुप रहूं तो हमारे रहने का तात्पर्य क्या रह जाएगा?गौमाता एवं धर्म की रक्षा हेतु मैं हर संभव प्रयास करूंगा और इसके निमित्त जो भी बलिदान देना पड़े मै तैयार हूं। हमारे जीवन में देवताओं एवं गुरुओं का बहुत महत्व है लेकिन फिर भी हमारे घर में पहली रोटी गौमाता हेतु निकाला जाता है इसी से हम गौमाता के महत्व को आसानी पूर्वक समझ सकते हैं। जगद्गुरू योगेश्वराचार्य महाराज ने कहा यदि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित नही किया गया तो यह निश्चित रूप से सरकार के पतन का कारण बनेगा। उक्त जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय के माध्यम से प्राप्त हुई है।


