Kashi ka News काशी सुमेरुपीठ में शतचंडी पाठ की पूर्णाहुति पर साधू-संत व बटुक भंडारा।

 काशी सुमेरुपीठ में शतचंडी पाठ की पूर्णाहुति पर साधू-संत व बटुक भंडारा।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

 वाराणसी। अस्सी स्थित डुमरांव बाग कॉलोनी के श्री काशी सुमेरुपीठ आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में नवरात्र के पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में नौ विप्रों द्वारा चल रहे शतचंडी पाठ का दिव्य एवं विधि-विधानपूर्वक समापन हुआ, पूर्णाहुति पर वैदिक मंत्रोच्चार एवं देवी स्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज ने कहा कि नवरात्र सनातन धर्म में शक्ति आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। मां भगवती की उपासना से साधक को आत्मबल, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक चेतना की प्राप्ति होती है। शतचंडी पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और समस्त विश्व के कल्याण की भावना से किए जाते हैं। सनातन परंपरा में वैदिक अनुष्ठानों और धार्मिक संस्कारों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य निरंतर होना चाहिए। पाठ की पूर्णाहुति में हजारों की संख्या में साधु-संतों, महात्माओं, बटुकों एवं श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज का दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के उपरांत परिसर में विशाल महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमे इसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों, बटुकों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर आचार्य अंबकेश्वर दुबे, डॉ विनय मिश्रा, बृजभूषणानंद सरस्वती, जितेन्द्रानानंद सरस्वती अखिल भारतीय संत समिति महामंत्री, दंडी समाज के अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम मठ मछली बंदर आदि उपस्थित रहे थे।