Kashi ka News स्वर्णमयी माँ अन्नपूर्णा के दरबार मे भक्तो को मिला खजाना।

 स्वर्णमयी माँ अन्नपूर्णा के दरबार मे भक्तो को मिला खजाना।

रिपोर्ट: आनंद सिंह अन्ना 

वाराणसी। मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान माँ स्वर्णमयी अन्नपूर्णा ने पांच दिवसीय दर्शन देना शुरू कर दिया है। पट खुलते ही भक्तों की आँखें भर आईं, हाथ स्वतः जुड़ गए और मुख से बस एक ही स्वर निकला माँ। किसी ने माथा टेका, किसी ने झोली फैलाई, किसी ने बस आँखें बंद करके माँ को मन में बसा लिया। स्वर्ण आभा में दमकती माँ का दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो गए। दर्शन के लिए सिर्फ काशी ही नहीं, देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी भक्त पहुँचे हैं। कोई उत्तर प्रदेश से, कोई बिहार से, कोई हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश से, तो कोई विदेश की धरती से माँ का खजाना लेने आया है। 


सबकी झोली में माँ का दिया सिक्का, धान और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी दौलत है। सुबह 3 बजे से 5 बजे तक मंदिर में सविधि पूजन-अर्चन, 11 आचार्यों के आचार्यत्व में महंत शंकरपुरी ने विधि-विधान से पूजन कर माँ की आरती उतारी। घंटा-घड़ियाल, शंखनाद और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। आरती के बाद महंत ने कामना की, "सभी के घर अन्न-धन से भरे हों, देश में खुशहाली हो, कोई भूखा न सोए, माँ सबकी मनोकामना पूरी करें।" महंत शंकर पूरी ने ठीक 5 बजे भक्तों के लिए पट खोल दिया। भक्त बाएं हाथ की ओर बनी अस्थाई सीढ़ी से होते हुए शिखर दर्शन करते हुए प्रथम तल पर विराजमान माँ का दर्शन करके खजाना लेते हुए भाव-विभोर होकर बाहर निकल रहे थें। 

कतार लंबी पर चेहरे पर शिकन नहीं। हर भक्त के मन में यही है, थोड़ा इंतजार सही, पर माँ का दर्शन तो होगा। मंदिर परिसर में स्वयंसेवी तैनात हैं, जो वृद्ध, दिव्यांग और असहाय भक्तों को सीधे दर्शन करवा रहे हैं। वहीं एक मेडिकल टीम भी तैनात है, जो किसी भी भक्त को छोटी सी भी समस्या होने पर तत्काल उपचार कर रही है। मंदिर प्रबंधक काशी मिश्रा ने कहा "हर चीज का ध्यान दिया गया है। सुरक्षा को लेकर मंदिर कंट्रोल रूम से लगातार सभी पर नजर रखी जा रही है। भक्तों के सुगम दर्शन हेतु माता का आशीर्वाद सदा बना रहे, यही कामना है।" 


मुख्य सहयोग रहा नीलकंठ से आये शिवांनंद गिरी, प्रदीप श्रीवास्तव, धीरेन्द्र सिंह, राकेश तोमर समेत मंदिर परिवार का रहा। सच ही है, काशी में जहाँ स्वयं बाबा विश्वनाथ ने भी झोली फैलाई थी, वहाँ आज हजारों-लाखों भक्त अपनी झोली भरकर लौट रहे थे। आँखों में आँसू, मन में संतोष, हाथ में माँ का खजाना और हृदय में एक ही विश्वास, माँ अन्नपूर्णा कभी किसी को भूखा नहीं सोने देतीं।

SOURCE: INFORMATION BY MAHANT SHANKAR PURI, ANNAPURNA TEMPLE ADMINISTRATION, VARANASI.